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लाहौल में ट्रैप कैमरे में कैद हुआ हिमालयन थार

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हिमालयन थार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी के सलग्रां में हिमालयन थार ट्रैप कैमरे में कैद हुआ है। भारत सरकार की ओर से प्राणी शास्त्र के वैज्ञानिक यहां पिछले करीब छह माह से नई प्रजाति के वन्य प्राणियों की खोज व अध्ययन में जुटे हैं। कुछ ही दिनों पूर्व इन वैज्ञानिकों की ओर से सलग्रां के पास लगाए गए ट्रैप कैमरे में एक हिमालयन थार कैद हुआ है।
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आमतौर पर समुद्रतल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले ये जीव अपनी प्यास बुझाने के लिए निचले क्षेत्रों के नदी-नालों का रुख कर रहे हैं। इसी बीच एक हिमालयन थार प्राणी शास्त्र के वैज्ञानिकों के ट्रैप कैमरे में कैद हो गया। टीम की ओर से घाटी के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए करीब डेढ़ दर्जन ट्रैप कैमरों में बर्फानी तेंदुआ, भूरा व काला भालू, आईबैक्स सहित कई जीव कैद हुए हैं। लेकिन हिमालयन थार उनके अध्ययन व खोज के बीच पहली बार कैमरे में कैद हुआ है। लाहौल-स्पीति जिले की पहाड़ियों पर आइबैक्स को देखना आम बात हो गई है। लेकिन अब शोधकर्ता नई-नई प्रजातियों के प्राणियों की खोज कर रहे हैं। विगत वर्ष लोनिवि में तैनात कर्मचारी जसरथ निवासी अमीर ने अपने कैमरे में दुर्लभ कस्तूरी मृग को कैद किया था। प्राणी शास्त्र के वैज्ञानिक मनीष कुमार ने इसकी पुष्टि की है।

हिमालयन थार होने का मिला प्रमाण : जयराम
डीएफओ लाहौल जयराम ठाकुर ने कहा कि लाहौल घाटी के तिंदी और मयाड़ क्षेत्र में अभी तक लोगों से यहां हिमालयन थार होने की बात सुनी थी। लेकिन इसके होने के पहली बार पुख्ता प्रमाण मिले हैं। यह प्राणी शाकाहारी और बकरे की प्रजाति का है। यह आमतौर पर 3000 मीटर की ऊंचाई पर मिलता है। माइनस तापमान के बीच ठंड में इन प्राणियों को पानी नहीं मिल रहा है। लिहाजा यह जीव निचले इलाकों में आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि निचले क्षेत्रों में आ रहे वन्य प्राणियों से किसी तरह की छेड़खानी न करें।
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