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एनजीटी की समिति ने की होटलों की रेकी

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कुल्लू। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से गठित विशेष विशेषज्ञ समिति ने मनाली के होटलों की रेकी की है। एनजीटी के आदेश पर मनाली पहुंची 11 सदस्य टीम रेकी करने के बाद लौट गई है। गुपचुप तरीके से पर्यटन नगरी मनाली पहुंची टीम ने प्रथम चरण में उन होटलों की लोकेशन को देखा, जिसकी जांच करने के बाद रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल की है। इसके बाद अब टीम गुप्त रूप से इन होटलों में दबिश देकर रिपोर्ट तैयार करेगी।
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प्रदेश सरकार ने सितंबर माह में एनजीटी में मनाली के 699 पंजीकृत होटलों की जांच सौंप दी है। क्या इन होटलों की जांच सही तरीके से की गई, अब इसकी जांच एनजीटी की विशेष विशेषज्ञ समिति करेगी। समिति के मनाली आने तथा होटलों की लोकेशन की रेकी करने की भनक होटलियारों को भी नहीं लगने दी। टीम में अधिकतर अधिकारी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय से जुड़े थे। इनमें केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के विशेषज्ञ शामिल रहे। जिला पर्यटन अधिकारी बीसी नेगी ने कहा कि एनजीटी की विशेष विशेषज्ञ समिति मनाली का दौरा कर लौट गई है।

एनजीटी ने 1700 होटलों की जांच के दिए हैं आदेश
एनजीटी ने मनाली के करीब 1700 होटलों की जांच करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत प्रदेश सरकार ने अभी तक एनजीटी को 699 होटलों की जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें 40 फीसदी होटलों में कई खामियां पाई गई हैं। पंजीकृत होटलों के पास न तो होटलों को चलाने के लिए पर्यटन विभाग की अनुमति है और न ही प्रदूषण बोर्ड, आईपीएच तथा टीसीपी की एनओसी मिली है। कई होटलों में टैक्स चोरी के मामले भी सामने आए हैं। जांच के दौरान होटलों में कमरों की संख्या 30 से 40 तक पाई गई, जबकि उनके पास अनुमति मात्र 15 से 20 कमरों की थी। इसके अलावा पेयजल को लेकर खामियां सामने आई हैं। कई होटलों ने सीधे नाले से पानी की सप्लाई जोड़ रखी थी।
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