स्वार। पीपली वन आरक्षित भूमि पर पाकिस्तान से आये शरणार्थियों द्वारा किए गए कब्जों के मामले में जिलाधिकारी द्वारा स्थानीय प्रशासन से वन की भूमि पर रह रहे काबिज लोगों के द्वारा जमा किये गए अभिलेखों को तलब किया है। प्रशासन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई से वन में रह रहे लोगों में एक बार फिर खलबली मची है।
तहसील क्षेत्र के थाना मिलक खानम स्थित पीपली वन की आराजी में देश आजाद होने के बाद पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को वन में पनाह दी गई थी। तब से पीपली वन की भूमि में यह लोग रहते चले आ रहे है। जैसे-जैसे धीरे धीरे आबादी बढ़ती गई।
इन शरणार्थियों द्वारा वन की भूमि पर आवासीय मकान बनाकर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर खेती करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पीपली वन क्षेत्र में लगभग 14 गांव आबाद हो गए। उन्हें सरकारी सुविधाएं भी मिलने लग गई। लेकिन आज तक उन्हें मालिकाना हक प्राप्त नहीं हो सका है। जिसको लेकर वह लगातार प्रयासरत हैं। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी भूमि से कब्जे हटवाए जाने के फरमान के बाद वन विभाग व प्रशासन द्वारा कार्रवाई शुरू की गई।
कुछ माह पूर्व जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने उप जिलाधिकारी से वन में बसे लोगों से उनके पास मौजूद सरकारी अभिलेख जमा कर तीन माह के भीतर जमा करा कर जिला मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए थे। तीन माह की अवधि बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा वन में रह रहे लोगों से लिये गए अभिलेख जिला मुख्यालय न भेजने पर जिलाधिकारी ने एसडीएम लालता प्रसाद शाक्य को तीन दिन के अंदर जमा किये गए ग्रामीणों के अभिलेख जिला मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए है। प्रशासन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई से वन आरक्षित भूमि में रह रहे लोगों में हलचल मची हुई है। एसडीएम लालता प्रसाद शाक्य ने बताया कि तहसीलदार संजय सिंह को जमा किये गए सभी ग्रामीणों के अभिलेख जिला मुख्यालय शीघ्र भेज कर अवगत कराने को कहा गया है। वहीं तहसीलदार संजय सिंह ने बताया कि वन की भूमि में रह रहे लोगों ने अपने आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक पासबुक, बिजली के बिल सहित अन्य सरकारी अभिलेख जमा किए हैं। जिन्हें जिला मुख्यालय भेजने की कार्रवाई की जा रही है।