उदयपुर (लाहौल स्पीति)। शिक्षा विभाग में विषम परिस्थितियों के बीच एक फीसदी कोटे के तहत अपने गृह जिला से दूसरी जगह तबादला करवाने में शिक्षकों की रुचि अब न के बराबर है। वर्तमान में शिक्षा विभाग लाहौल के पास एक भी आवेदन लंबित नहीं है। वर्ष 2016-17 में एक सीएंडवी और दो जेबीटी अध्यापकों ने यहां से दूसरे जिला में तबादला करवाया है।
नियमानुसार स्थानांतरण प्रक्रिया में पहले पांच फीसदी कोटा था। सितंबर 2009 से प्रदेश सरकार ने कोटा घटाकर एक फीसदी कर दिया। कोटा घटाए जाने व वरिष्ठता की शर्त ने इस तबादले की प्रक्रिया को काफी कम कर दिया। अपने गृह जिला से अन्यत्र तबादला करवाने की राह में कड़े नियम आड़े आ रहे हैं। मसलन यदि किसी कर्मचारी व अधिकारी ने एक फीसदी कोटे से अन्यत्र तबादला करवाया तो उस सूरत में उसकी पदोन्नति की राह मुश्किल हो जाएगी। सेवा में वरिष्ठता शिक्षक को अपने जिला में रहते हुए ही मिलेगी। जनजातीय जिला लाहौल, चंबा के पांगी, भरमौर, किन्नौर में कार्यरत कर्मचारियों के पलायन को रोकने में सरकार के यह आदेश काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं। लाहौल से महज तीन शिक्षकों ने ही तबादला करवाया है। अगर कर्मचारी तबादले के चार साल के अंदर दोबारा गृह जिला का रुख करता है तो उसकी वरिष्ठता कायम रहेगी।
शिक्षा उपनिदेशक लाहौल प्रेमनाथ परशीरा ने कहा कि वरिष्ठता सूची व पदोन्नति नियम कड़े होने के कारण अब शिक्षक गृह जिला छोड़कर दूसरी जगह जाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वर्ष 2017 महज तीन शिक्षकों ने एक फीसदी कोटे के तहत तबादला करवाया है।