सैंज (कुल्लू)। जिला कुल्लू की दुर्गम पंचायत शांघड़ के बरशांघड़ में बेघर हुए छह परिवार के लोग अपने मवेशियों के अलावा कुछ भी नहीं बचा पाए हैं। देखते ही देखते इन लोगों के लकड़ी के बने घर राख के ढेर में बदल गए। प्रभावित महिलाएं रविवार सुबह अपने जले घरों को देखकर फूट-फूट कर रोने लगी।
आग ने मकानों को पलभर में अपनी चपेट ले लिया और प्रभावित लोग अपनी आंखों के सामने जीवनभर की पूंजी को जलते हुए देखते रह गए। प्रभावित माघू राम, तारा देवी, लेद राम, चुन्नी लाल, कमला देवी और लगन चंद ने कहा कि उनके घरों में आग इतनी तेजी से लगी कि उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला था। उन्होंने कहा कि शनिवार शाम को खाना खाने के बाद कई लोग सोने की तैयारी में थे। लेकिन इस बीच देवता सरूनाग के निर्माणाधीन मंदिर के साथ पुजारी के घर में आग लग गई। हाहाकार के बीच वह जब घरों से बाहर निकले तो आग की लपटों ने उनके घरों को अपनी चपेट में ले लिया था उन्हें घर के अंदर रखे सामान व हजारों की नकदी को निकालने का वक्त ही नहीं मिला। माघू राम, लेद राम व लगन चंद ने कहा कि अपना घर जलने के बाद उन्हें दूसरे के घरों में शरण लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि भीषण आग के इस भयानक मंजर को देखकर उन्हें रातभर नींद नहीं आई। शांगड़ सर्कल के पटवारी जोगिंद्र सिंह ने कहा है कि मंदिर सहित मकानों को करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है। अपने अधिष्ठाता देवता का मंदिर व मकानों के जलने से गांव के लोग सदमे में हैं।