कुल्लू। ढालपुर के प्रदर्शनी मैदान में उमंग कृष्णा उत्सव समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय कृष्ण जन्मोत्सव का सोमवार को समापन हुआ। इस अवसर पर भगवान कृष्ण की बालरूपी मूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना की गई। सुबह से मैदान में भगवान कृष्ण, देवता घटोत्कच, देवता नरसिंह महाराज के दर्शनों के लिए भक्तों की उमड़ी। साथ ही डीजे की धुनों पर युवा थिरके।
इससे पहले रविवार करीब आठ बजे बालरूपी कृष्ण ने सतनाजे की पिंडी में गर्भधारण किया। इसके बाद ठीक 12 बजे कृष्ण का जन्म हुआ। कृष्ण के जयकारों से ढालपुर गूंज उठा। उत्सव में शरीक होने के लिए भुंतर के देवता घटोत्कच और बशौणा के नरसिंह महाराज भी यहां पहुंचे थे। कृष्ण जन्म के बाद उन्हें झूला भी झुलाया गया। सोमवार दोपहर बाद प्रदर्शनी मैदान में डीजे आनंद उत्सव भी मनाया गया। इसमें सैकड़ों युवाओं ने कृष्ण सखाओं के संग ठुमके लगाए। देर शाम देवता घटोत्कच, नर सिंह भगवान और बालरूपी कृष्ण मूर्ति को परंपरा के साथ उत्सव मैदान से विदाई दी गई। उमंग कृष्णा उत्सव समिति संस्था के आयोजक व संस्थापक ललित कुमार ने कहा कि भगवान की बालमूर्ति का सतनाजे के पिंडी में गर्भधारण किया गया। लगभग चार घंटे तक भगवान पांच तत्वों से अलग रहे। ऐसी परंपरा सिर्फ कुल्लू जिला में ही निभाई जाती है। उन्होंने कहा कि कृष्ण जन्म की खुशी में आनंद उत्सव मनाया गया। इसमें कृष्ण सखाओं के साथ भक्त डीजे की धुनों पर झूूमे। उत्सव में ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाटी भी डाली गई। उन्होंने कहा कि उत्सव में इस बार पिछले साल के मुकाबले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है।