खराहल (कुल्लू)। स्पर वैरायटी की कांट-छांट रॉयल और अन्य पुरानी वैरायटी के सामान हरगिज नहीं होनी चाहिए। अगर बागवान सामान्य रॉयल की तरह कांट-छांट करते हैं तो बागवानों को स्पर से उम्मीद के अनुरूप उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त नहीं होती है। लिहाजा बागवानों को स्पर वैरायटी की प्रूनिंग बागवान सही तरीके से करता है तो चार साल में करीब आधी पेटी सेब उत्पादन में सक्षम हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी वैरायटी में रंग कम आने की समस्या रहती है, जिससे इनकी प्रूनिंग रेग को ध्यान में रखकर की जाती है। इन पौधों में सूर्य का प्रकाश हर शाखा में पहुंचना अति आवश्यक है। ऐसे में सेब का रंग उम्दा किस्म का आ जाता है। स्पर वैरायटी में रंग की कोई दिक्कत नहीं रहती है। घाटी के बागवान ज्ञान ठाकुर, अमित ठाकुर, रोशन लाल, चुनी लाल, कमल, महेश शर्मा, संजीव शर्मा, केहर सिंह और चमन आदि के अनुसार स्पर वैरायटी की प्रूनिंग विशेषज्ञों की राय से करते हैं। इससे फसल पर सकारात्मक परिणाम मिले हैं। उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर के अनुसार स्पर प्रजाति में 2 इंच में बीमें हटाए जाते हैं तो फल का साइज स्माल बन जाता है। अगर चार इंच में हटाए जाते हैं तो फल का आकार मीडियम और यदि 6 इंच की दूरी पर बीमें रख जाते है तो फल लार्ज साइज का मिल जाता है। स्पर वैरायटी में ज्यादा बीमें छोटी अवस्था ही विकसित हो जाते हैं और पुराने बीमों वाली शाखाओं को आधे से दो तिहाई तक काट देना चाहिए। इससे अगले वर्ष नई शाखाओं में बीमें आते हैं।