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Kullu Dussehra: नरसिंह भगवान की जलेब देखने उमड़े हजारों लोग, वाद्ययंत्रों की थाप पर देवताओं के संग झूमे देवलू

Tue, 15 Oct 2024 07:19 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।

सार

कुल्लू दशहरा में नरसिंह भगवान की भव्य जलेब को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जलेब में ढोल नगाड़ों की स्वरलहरियों के बीच देवताओं के साथ देवलू भी झूमे। शाम करीब 4:30 बजे जलेब शुरू हुई। 
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कुल्लू दशहरा के दूसरे दिन निकली भगवान नरसिंह की जलेब। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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देव महाकुंभ कुल्लू दशहरा में मंगलवार को लाव-लश्कर के साथ नरसिंह भगवान की दूसरी जलेब निकली। भव्य जलेब को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। राजा की चानणी से पूरे ढालपुर मैदान की परिक्रमा के बाद जलेब राजा की चानणी के पास ही समाप्त हुई। जलेब में कुल छह देवताओं ने शोभा बढ़ाई।

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जलेब में ढोल नगाड़ों की स्वरलहरियों के बीच देवताओं के साथ देवलू भी झूमे। शाम करीब 4:30 बजे जलेब शुरू हुई। सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी सज-धजकर चली। इसके बाद बजंतरी और देवलू चले। छह देवताओं के बीच में भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह की पालकी चली। पालकी के दोनों तरफ देवता चले। पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने जलेब के भव्य नजारे को कैमरे में कैद किया। जलेब नरसिंह भगवान की होती है। जलेब के माध्यम से नरसिंह भगवान ढालपुर में कार बांधते हैं। जलेब का यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहेगा। दशहरा उत्सव सात दिन तक चलता है। पांच दिनों तक जलेब निकलती है। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि दूसरी जलेब के दौरान परंपरा का निर्वहन किया गया है।

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भगवान रघुनाथ के रथ के पास मौली तोड़ने पर पुलिस का पहरा
भगवान रघुनाथ के रथ के पास कोई हाथ की मौली और राखी न तोड़े, इसके लिए रथ के पास पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। दो पुलिस कर्मी यहां तैनात किए गए हैं। पोस्टर भी लगाए गए हैं। लोग दो-तीन दिन से दशहरा में हाथों की डोरी और राखी रथ के पास तोड़कर फेंक रहे थे। शाम तक डोरी और राखी के ढेर लग रहे थे, जिन्हें भगवान रघुनाथ के सेवकों को प्रतिदिन हटाना पड़ता था।

बताया जा रहा है कि कुछ साल पहले यह परंपरा नहीं थी। एक-दूसरे की देखादेखी में यह प्रचलन बढ़ गया। अब दशहरा में रघुनाथ के रथ के पास हाथ की राखी और डोरी तोड़ने की होड़ मच रही थी। देवसमाज से जुड़े लोगों के अनुसार हाथ की डोरी और राखी तोड़ने से रघुनाथ के रथ की अशुद्धता हो रही थी। इसलिए यहां पर पुलिस का पहरा और पोस्टर चिपकाने लगाने का फैसला लिया गया। भगवान रघुनाथ के रथ को ढक कर रखा जाता है। दशहरा के पहले और आखिरी दिन ही रथ के पर्दे हटाए जाते हैं। भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह का कहना है कि लोगों से अपील की गई है कि वह रथ के ऊपर राखी और डोरी न चढ़ाएं।
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