धर्मशाला। कांगड़ा जिला में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं थायराॅइड की चपेट में अधिक आ रही हैं। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में रोजाना के लगभग 40 थायरॉइड के टेस्ट हो रहे हैं और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोजाना लगभग 150 से 200 मरीज थायरॉइड की जांच के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 60 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिन्हें इस गंभीर बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होती। पुरुषों के मुकाबले आठ गुना महिलाएं थायराॅइड का शिकार होती हैं। यही नहीं, इस बीमारी की चपेट में युवतियां भी आ रही हैं। जोनल अस्पताल धर्मशाला की ओपीडी में हर 10 में से छह से सात मरीज थायराॅइड की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
गर्भवतियों के लिए ज्यादा जोखिम
थायॅराइड को लोग सामान्य बीमारी की तरह लेते हैं, लेकिन यह बीमारी गर्भवतियों के लिए ज्यादा खतरनाक है। महिलाओं में यह बीमारी होने की आशंका 50 से 60 फीसदी होती है। यह गले का रोग है, जो हार्मोन असंतुलन के कारण होता है। गले के बगल में एक ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करती है। इसकी वजह से शरीर की सभी कोशिकाएं सही ढंग से काम करती हैं, लेकिन इस बीमारी में यह ग्रंथि अनियंत्रित हो जाती है, जो शरीर में असंतुलन पैदा करती है। इसकी वजह से शरीर में तमाम तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
थायराॅइड के लक्षण
व्यवहार में चिड़चिड़ापन और उदासी, सर्दी में भी पसीना निकलना, जरूरत से ज्यादा थकान और अनिद्रा, तेजी से वजन बढ़ना या कम होना और महिलाओं में माहवारी में अनियमितता इसके लक्षण हैं।
जाेनल अस्पताल धर्मशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि शरीर में बदलाव महसूस होने पर और थायराॅइड के लक्षण महसूस होने पर इसकी जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाकर करवाएं। साथ ही उन्होंने वजन नियंत्रित करने और समय रहते जांच कराने की सलाह दी है।