-अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय देहरा ने सुनाया फैसला
-विवाह के बाद ससुराल पक्ष पर लगातार पीटने के आरोप
-गर्भावस्था के दौरान खेतों में काम करने के लिए किया मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के मामले में महिला की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायालय ने विवाह विच्छेद की डिक्री (वह अंतिम आधिकारिक आदेश जो अदालत की ओर से विवाह को कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए जारी किया जाता है) पारित कर दी। अदालत ने पति की ओर से की गई क्रूरता और परित्याग को तलाक का पर्याप्त आधार माना। महिला ने पति पर नशे में पीटने और दहेज मांगने के आरोप लगाए थे। सुनवाई के दौरान पति अदालत में मौजूद नहीं हुआ। इसके चलते अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय देहरा सपना पांडेय की अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया।
देहरा के अंतर्गत एक क्षेत्र की महिला ने तहसील बड़ोह के तहत पति के खिलाफ हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद पति और ससुराल पक्ष ने उसे लगातार पीटा, मानसिक उत्पीड़न और दहेज की मांग की। पति शराब के नशे में घर लौटकर पीटता था और चरित्र पर संदेह कर अपमानित करता था।
गर्भावस्था के दौरान भी उसे खेतों में काम करने के लिए मजबूर किया और उचित इलाज तक नहीं दिया गया। पति और सास ने 2 लाख रुपये नकद और सोने के आभूषणों की मांग की। कई बार पंचायत और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से समझौते हुए लेकिन पति के व्यवहार में सुधार नहीं आया। महिला ने अदालत को बताया कि वर्ष 2021 में उसे दोबारा घर से निकाल दिया और तब से दोनों अलग रह रहे हैं।
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर मामले में अदालत ने महिला और बच्चों के लिए भरण-पोषण राशि भी तय की थी लेकिन पति ने उसका भुगतान नहीं किया। महिला ने मां और पंचायत प्रतिनिधि के बयान भी अदालत में पेश किए। अदालत ने माना कि महिला के आरोप साक्ष्यों से साबित होते हैं और पति का व्यवहार क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्ष लंबे समय से अलग रह रहे हैं और वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं। अदालत ने विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री जारी करने के आदेश दिए।