धर्मशाला। शराब के नशे में मारपीट, गाली-गलौज और गंभीर प्रताड़ना के बाद पत्नी व मासूम बेटी को बेसहारा छोड़ने वाले पति के साथ 15 साल पुराना वैवाहिक नाता आखिरकार टूट गया। परिवार न्यायालय देहरा की अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री जारी करते हुए पीड़िता को राहत दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़िता द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों का पति की ओर से कोई खंडन नहीं हुआ और रिकॉर्ड से पति की क्रूरता पूरी तरह साबित होती है। मूल रूप से झारखंड निवासी और वर्तमान में ज्वालामुखी में रह रही महिला का विवाह मार्च 2011 में हमीरपुर में एक ठेकेदार के पास कार्यरत झारखंड के ही एक व्यक्ति के साथ हुआ था।
दंपति के दो बच्चे हैं। विवाह के करीब दो साल बाद से ही पति ने शराब पीकर उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी थी। उसने महिला को मायके वालों से बात करने से रोका और भरण-पोषण व बुनियादी खर्च देना भी बंद कर दिया। वर्ष 2015 से नवंबर 2020 तक दोनों ज्वालामुखी में किराये के मकान में रहे। 15 दिसंबर 2020 को पति ने फिर बेरहमी से मारपीट की।
जब पत्नी ने पुलिस कार्रवाई की बात कही, तो पति अगले दिन उसे और बेटी को छोड़कर भाग गया। इसके बाद से पीड़िता मजदूरी कर अपना और अपनी बेटी का पालन-पोषण कर रही है, जबकि बेटा पिता के पास है।
अदालत के सम्मन के बावजूद पति उपस्थित नहीं हुआ, जिस पर दिसंबर 2024 में उसके खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई की गई थी। गवाहियों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि पति ने बिना किसी ठोस वजह के परिवार का परित्याग किया और क्रूरता बरती, जिसके चलते अदालत ने इस विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया।