पालमपुर (कांगड़ा)। भवारना उपतहसील में एक फर्जी कृषक प्रमाण पत्र के जरिये हुई एक जमीन की रजिस्ट्री के बाद अब तक इस मामले में एफआईआर न होने पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वर्तमान सुलह के विधायक विपिन सिंह परमार ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रशासन से जानना चाहा कि इस जमीन पर धोखे से बनाया गया कृषक प्रमाण पत्र लगा है। इसके बाद इस जमीन की रजिस्ट्री का मामला लैंड रिफार्म एंड टेनेंसी एक्ट की धारा 118 के तहत जिला उपायुक्त को चला गया है, लेकिन इस फर्जी प्रमाण पत्र को बनाने वाले और पास करने वाले कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है।
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस जमीन की रजिस्ट्री के मामले में व्यक्ति शामिल है। उस व्यक्ति के पिता को प्रशासन ने विशेष समुदाय की बैठक में कैसे बुला लिया। जबकि व्यक्ति का बेटा इस मामले में जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मामले में बड़ी बात यह है कि जिस व्यक्ति ने इस जमीन के रजिस्ट्री के लिए जाली कृषक प्रमाण पत्र बनाया, उस व्यक्ति के खिलाफ अभी तक प्रशासन ने पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं की। जबकि इस मामले में सीधे एफआईआर बनती थी।
जांच और नोटिस के नाम पर अब तक इस मामले में प्रशासन पर्दा डाल रहा है। जबकि अब तक इस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। जब जमीन की रजिस्ट्री गलत होने पर इस मामले की रिपोर्ट जिला उपायुक्त को भेज दी गई तो इस मामले में जाली प्रमाण पत्र बनाने पर क्या कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि यह मामले उनके विधानसभा सुलह के भवारना उपतहसील से जुड़ा हुआ है और उन्हें इस बात का पूरा अधिकार है कि प्रशासन ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है। प्रशासन इस मामले में ढील बरतता या किसी के दबाव में काम करता है तो भाजपा इस बात को बर्दाश्त नहीं करेगी।