नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। कांगड़ा घाटी के चार पंचायतों के ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक पर क्रॉसिंग की सुविधा न मिलने को लेकर रेल मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। साथ ही शीघ्र कार्रवाई न होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। नंदपुर, बरियाल, खब्बल और कथोली के ग्रामीण लंबे समय से रेलवे क्रॉसिंग की मांग कर रहे हैं।
रविवार को नंदपुर, बरियाल, खब्बल और कथोली पंचायतों के ग्रामीणों ने नंदपुर भटोली में बैठक कर रेलवे विभाग से जल्द समाधान की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पौंग बांध बनने के बाद पुरानी रेलवे लाइन को हटाकर जवाली से गुलेर तक 25 किलोमीटर लंबी नई लाइन डाली गई है। यह लाइन कई पंचायतों और गांवों के बीच से गुजर रही है। मगर गांवों में रेलवे क्रॉसिंग की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले रेलवे विभाग ने इन गांवों के लिए चार क्रॉसिंग बनाने का सर्वे किया था, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर की आबादी के लिए यातायात की कोई सुविधा नहीं है। जंगलों और दुर्गम पहाड़ों से घिरे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। एंबुलेंस, डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों का यहां पहुंचना नामुमकिन हो गया है।
बंजर हो रही खेती योग्य भूमि
रिटायर्ड कर्नल गुरचरण सिंह, बीडीसी महेंद्र सिंह, रिटायर्ड कैप्टन सुरेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह, जसविंदर सिंह, कुलवंत सिंह, पृथ्वी पाल, विजय रंधावा, परमजीत सिंह और सोमेश्वर आदि ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी मुश्किलें पेश आ रही हैं, क्योंकि स्कूल बसें इन क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पातीं। कृषि कार्यों में भी समस्याएं आ रही हैं, क्योंकि ट्रैक के उस पार खेतों में ट्रैक्टर नहीं जा सकते। इससे कृषि योग्य भूमि भी बंजर हो रही है।
निर्माण सामग्री पहुंचा भी महंगा
ग्रामीणों ने कहा कि निर्माण सामग्री भी तीन गुणा भाव देकर रेलवे लाइन के दूसरी तरफ पहुंचानी पड़ती है। पीड़ित लोगों ने स्थानीय और केंद्रीय नेताओं को इन लोगों के लिए कुंभकर्णी से जागने की अपील की है। ग्रामीणों ने बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर रेलवे विभाग द्वारा रेलवे क्रासिंग की आगामी कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया गया तो मजबूरन एक बड़ी बैठक कर आंदोलन शुरू किया जाएगा।