संवाद न्यूज एजेंसी
बैजनाथ (कांगड़ा)।
मानवीय परिंदों के साहसिक खेल में दुर्घटनाओं का अंदेशा सदैव बना रहता है । 80 के दशक में शुरू हुए इस साहसिक खेल में अब तक 20 से अधिक पायलट व अन्य अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। इस वर्ष ही विदेशी महिला पायलट सोलो उड़ान के दौरान धर्मशाला की उपरी पहाड़ियों में गिरने से मौत की शिकार बन चुकी है। वीड बिलिंग का पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से इन पैराग्लाइडिंग उड़ानों पर निर्भर है लेकिन पायलटों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई भी ठोस निर्णय धरातल पर क्रियान्वित नहीं हो सके हैं। पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध वीड बिलिंग के टेक ऑफ पॉइंट और लैंडिंग साइट पर नियमों की अवेहलना करने वालों पर निगरानी के लिए पर्याप्त स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है। हालांकि साडा के तहत स्टाफ नियुक्त है लेकिन दुर्घटना के बाद ही इन पर चर्चा शुरू होती है।