धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के चुनावों में स्पष्ट जनादेश हासिल करने के बाद अब भाजपा की नजरें मेयर और डिप्टी मेयर पद के आरक्षण रोस्टर पर टिक गई हैं। चुनाव में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद पार्टी के भीतर संभावित चेहरों और सियासी समीकरणों को लेकर गुणा-भाग शुरू हो गया है। हालांकि आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही सत्ता के शीर्ष पदों के लिए असली तस्वीर सामने आ पाएगी।
धर्मशाला नगर निगम के कुल 17 वार्डों में से 11 सीटों पर भाजपा ने अपना परचम लहराया है। पार्टी के पास पार्षदों के रूप में विविध विकल्प हैं। इनमें सामान्य महिला वर्ग से पांच, अनुसूचित जाति (एससी) की महिला सहित दो, अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला सहित दो और अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी से दो पार्षद जीतकर आए हैं।
पार्टी सूत्रों की मानें तो रोस्टर जारी होने के बाद ही भाजपा हाईकमान जातीय संतुलन, संगठन के प्रति निष्ठा, राजनीतिक अनुभव और भविष्य की रणनीतियों को ध्यान में रखकर कोई अंतिम फैसला लेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभव और नए नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की होगी।
यदि मेयर का पद अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित होता है, तो समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे और सीमित चेहरों में से ही किसी एक को कमान सौंपनी होगी। इसके विपरीत यदि यह पद अनारक्षित श्रेणी के रखा जाता है तो पार्टी के भीतर दावेदारों की फेहरिस्त लंबी हो जाएगी। इससे अंदरूनी असंतोष को थामना नेतृत्व के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
कार्यकाल-मेयर, डिप्टी मेयर
2017 (पहले ढाई साल)-रजनी ब्यास-देवेंद्र जग्गी
2017 (अगले ढाई साल)-देवेंद्र जग्गी-ओंकार नैहरिया
2022 (पहले ढाई साल)-ओंकार नैहरिया-सर्वचंद गलोटिया
2022 (अगले ढाई साल)-नीनू शर्मा-तेजेंद्र कौर