धर्मशाला। जिला लाइब्रेरी के पास आने वाले विद्यार्थियों को अब घर जैसा स्वाद और सादा भोजन मिल रहा है। इसका श्रेय दाड़ी निवासी 45 वर्षीय सुनंदा को जाता है। इन्होंने पसंदीदा काम को ही रोजगार बना लिया। शिक्षिका, टूर एंड ट्रैवल और कपड़ा कारोबार से जुड़ने के बाद उन्होंने पति के साथ कचहरी परिसर में कैंटीन शुरू की। आज यह कैंटीन विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के बीच खास पहचान बना चुकी है।
सुनंदा ने बताया कि उन्हें खाना बनाने का शौक था। मनपसंद काम नहीं मिलने पर उन्होंने होटलों में काम कर अनुभव हासिल किया। बाद में पार्टनरशिप में ढाबा भी चलाया।
इसके बाद पति के साथ मिलकर करीब दो वर्ष पहले कचहरी परिसर में कैंटीन शुरू की।
उन्होंने बताया कि वह भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देती हैं। आसपास के कार्यालयों के कर्मचारी भी कैंटीन में पहुंचते हैं। दोनों हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। संवाद
पूजा विद्यार्थी
पूजा विद्यार्थी
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