नरसिंह मंदिर, रक्कड़ में चल रही कथा के दौरान उपस्थित संगत। स्रोत: आयोजक
रक्कड़ (कांगड़ा)। स्मृति के विसर्जन में ही चैतन्य का जागरण छिपा हुआ है। हम वर्तमान में जीना सीख लें तो दुश्चिंताओं से मुक्त हो सकते हैं। वर्तमान समय में गुरु होना आसान है, शिष्य बनना मुश्किल। हम शास्त्र को नहीं, समझ को आधार बनाना चाहिए। यह विचार श्रीनरसिंह पुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक अतुल कृष्ण ने भगवान नरसिंह मंदिर रक्कड़ में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय प्रेम सरिता है, सरोवर नहीं। परमात्मा को प्राप्त करने के लिए लोगों को सत्य में जीना चाहिए, लेकिन लोग तो असत्य में जीते हैं। उन्होंने कहा कि सत्य परमात्मा का ही रूप है। भाग्यशाली हैं वे लोग जो भगवान की कथा की छत्रछाया में बैठकर अपना जीवन संवारते हैं। इस अवसर पर देशबंधु, संजीव शर्मा, धर्म सिंह, सुरजीत धीमान, मनोज गुरु, विशाल शर्मा और ईशान शर्मा सहित अन्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। संवाद