पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के विशेषज्ञों ने अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े में किए जाने वाले कृषि कार्यों को लेकर किसानों को सलाह जारी की है। इसमें गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों और विभिन्न सब्जियों की बिजाई व पौध रोपाई की जानकारी दी गई है।
किसान गेहूं की एचएस-542 और वीएल-829 किस्मों की बिजाई अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक कर सकते हैं। जौ के लिए हिम पालम जौ-1, हिम पालम जौ-2 और एचबीएल-113 किस्में उपयुक्त हैं।
चने की हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2 और जीपीएफ-2 किस्मों में कतारों के बीच 30 सेंटीमीटर, जबकि एचपीजी-17 में 50 सेंटीमीटर दूरी रखें। निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की पालम त्रिलोकी, अरकल और वीएल-7 किस्मों की बिजाई की जा सकती है। लहसुन के लिए जीएचसी-1, एग्री-फाउंड पार्वती और सोलन सिलेक्शन किस्में उपयुक्त हैं।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. जनार्दन सिंह ने बताया कि किसान पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और शलजम की सीधी बिजाई करें। फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली और गांठगोभी की तैयार पौध रोपें। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में प्याज की नर्सरी तैयार करने का भी यह उचित समय है।
कृषि विशेषज्ञों ने खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करने और फसलों को आवश्यक पोषक तत्व देने की सलाह दी है। मटर में विल्ट और गेहूं-जौ में कंगियारी रोग से बचाव के लिए बिजाई से पहले बीज उपचार करें। कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का प्रयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह व उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें।