कोरोना के बाद पहली बार हुई टांडा मेडिकल कॉलेज में रोगी कल्याण समिति की बैठक
पूर्व में स्वीकृत कार्यों को पूरा करने के लिए सिमिति की बैठक में मिली मंजूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा में वर्ष 2022 से जिन टेंडरों को एक्सटेंशन मिली थी, वह जल्द ही खत्म होगी। अब नए सिरे से इन मदों के टेंडरों को लगाना होगा। इसमें दवाइयां, उपकरण सहित कई अन्य चीजों के टेंडर शामिल हैं। यह फैसला मंगलवार को टीएमसी की रोगी कल्याण समिति की बैठक में लिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने ऑनलाइन बैठक में हिस्सा लेते हुए 2022 के टेंडरों को एक्सटेंशन देने और अन्य कार्यों को समय पर पूरा न करने पर नाराजगी जताई। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षुओं को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए कि जल्द पुराने टेंडरों का दोबारा रिटेंडर किया जाए और इसमें पारदर्शिता लाई जाए। साथ ही पिछली आरकेएस की बैठक में अप्रूव किए गए कार्यों को जल्द पूरा करने के भी निर्देश दिए गए।
जानकारी के अनुसार कोरोना काल के बाद एक बार भी टांडा मेडिकल कॉलेज में आरकेएस की बैठक आयोजित नहीं की गई थी। इस वजह से कई कार्य लटके हुए थे। बैठक के दौरान अस्पताल में टूटे फर्नीचर, शौचालयों सहित अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने टांडा के मुख्य गेट से मरीजों और उनके तीमारदारों को लाने और छोड़ने के लिए दो ई-रिक्शा भेंट करेंगे, जो दिन-रात अपनी सेवाएं देंगे। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा, एमएस डॉ. अशोक वर्मा, एडीएम कांगड़ा डॉ. हरीश गज्जू समेत आरकेएस के सदस्य आदि मौजूद रहे।
धार्मिक स्थलों की तरह स्वच्छ हों अस्पताल : शांडिल
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल के दूरदराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक उपकरणों की सुविधा उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पताल, धार्मिक स्थलों की तरह स्वच्छ और साफ-सुथरे होने चाहिए, ताकि उपचार के लिए आने वाले मरीजों एवं तीमारदारों को अच्छा वातावरण उपलब्ध हो सके। चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में आरकेएस के तहत कार्यरत कर्मचारियों के नियमितिकरण एवं न्यूनतम वेतन के संबंध में नीति बनाने के लिए निरंतर मांग की जा रही है। इस दिशा में भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों में विभिन्न सेवाओं से संबंधित ऐसे सभी टेंडर, जिनकी अवधि पूरी हो चुकी है या पूरी होने वाली है को नए तरीके से एचपीएसईडीसी के माध्यम से पूरा किया जाएगा।