जवाली (कांगड़ा)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीएटी) के आदेशानुसार जवाली की पंचायत नाणा में वन भूमि पर बनी ढाई किलोमीटर सड़क की जांच की गई। जांच के दौरान प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल रही।
मौके पर एसडीएम जवाली नरेंद्र सिंह जरियाल, डीएफओ नूरपुर संदीप कोहली, वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ रेजीनॉड रॉयलस्टोन सहित अन्य अधिकारियों ने डोबा गांव से लेकर दिल्लू दीन के घर तक जंगल के बीच बनाए गए रास्ते का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
मामले के शिकायतकर्ता एवं पूर्व प्रधान ओंकार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क वन भूमि पर बनाई गई है। उनका दावा है कि घने जंगल से रास्ता निकालने के दौरान लाखों की संख्या में कीमती जड़ी-बूटियों, पेड़-पौधों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि यदि यह 40-50 वर्ष पुराना रास्ता था तो फिर मौके पर भारी मशीनरी (जेसीबी) के ताजा निशान क्यों दिखाई दे रहे हैं।
छह मरले भूमि आवंटन पर भी उठे सवाल
इस मामले में वर्ष 2020-21 में घने जंगल के बीच लगभग छह मरले भूमि एक व्यक्ति को अलॉट की गई, जबकि उसके नाम पहले से अन्य स्थानों पर पर्याप्त भूमि दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह आवंटन नियमों के विरुद्ध प्रतीत होता है, जिस कारण उन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
उधर, एसडीएम जवाली नरेंद्र सिंह जरियाल ने कहा कि अलॉटमेंट के कागजात देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि आवंटन अवैध पाया गया तो उसे रद्द किया जाएगा।
वहीं, डीएफओ संदीप कोहली ने बताया कि स्थानीय लोगों के अनुसार यह रास्ता 40-50 वर्ष पुराना है। संबंधित व्यक्ति को 4-5 वर्ष पहले भूमि अलॉट हुई है। इसकी जांच करवाई जाएगी।