राजनीतिक स्वार्थ के चलते नेताओं ने केंद्रीय विवि के लिए महज देहरा में दिखाई जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। सरकार कितना सच्ची बोलती है इसका पता प्रदेश उच्च न्यायालय में 19 मई तक दाखिल किए जाने वाले जवाब से पता चलेगा। कुछ नेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते केंद्रीय विवि के लिए महज देहरा में जमीन दिखाई और धर्मशाला से केंद्रीय विवि दूर चला गया।
यह बात समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विवि संघर्ष समिति के सदस्य अतुल भारद्वाज ने शनिवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में ही बनना था और इसके लिए जब पहली बार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से कमेटी आई थी तो उन्होंने विवि के लिए धर्मशाला के आसपास जमीन उपलब्ध करवाने की बात कही थी, लेकिन कमेटी को महज देहरा की जमीन दिखाकर उसे विवि के लिए फाइनल करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि जिनके राजनीतिक स्वार्थ थे वे धर्मशाला में केंद्रीय विवि की आलोचना करते रहे और पर्दे के पीछे साजिशें रचते रहे। लेकिन अब वे सभी लोग न्यायालय के माध्यम से बेनकाब होंगे। भारद्वाज ने कहा कि जनता को न्यायालय पर पूरा विश्वास है कि धर्मशाला के हितों की अनदेखी नहीं होगी।
न्यायालय ने 19 मई तक प्रदेश और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। देखा जाएगा कि प्रदेश और केंद्र सरकार न्यायालय में क्या जवाब देती हैं। भारद्वाज ने कहा कि दो साल से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू यह कहते रहे कि जदरांगल में केंद्रीय विवि के कैंपस निर्माण के लिए सर्वे चल रहा है और सरकार जल्द 30 करोड़ रुपये जमा करवाएगी। विधानसभा सत्र और धर्मशाला विस उपचुनाव के दौरान भी मुख्यमंत्री ने जनता के बीच कहा था कि चुनाव परिणाम के तुरंत बाद पैसा जमा करवा दिया जाएगा।
आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा ने भी सोशल मीडिया पर 31 मार्च से पहले धर्मशाला विवि का पैसा जमा करवाने की बात कही थी। संघर्ष समिति ने इन नेताओं की बातों पर विश्वास किया, लेकिन जब पैसा जमा नहीं हुआ तो जनता को लगा कि सरकार जनभावनाओं से खेल रही है। क्योंकि विवि के मुद्दे को लेकर धर्मशाला की जनता ने बीते वर्ष अपने दैनिक रोजमर्रा के काम और दिहाड़ी-मजदूरी को छोड़ कर विशाल आंदोलन किया था, लेकिन जब सुनवाई न हुई तो इस पर हम प्रदेश उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर गए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि 19 मई से पहले केंद्रीय विवि के हिस्से का 30 करोड़ रुपये जमा करवाया जाए। अगर ऐसा न हुआ तो सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ी जाएगी। जनता के सहयोग से इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।