देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण आठ साल से अपने भवन की राह देख रहा राजकीय महाविद्यालय देहरा को अब प्रदेश सरकार की नजर ए इनायत की जरूरत है। देहरा कॉलेज प्रशासन ने तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अब भवन निर्माण के लिए प्रदेश सरकार को आगामी औपचारिकताओं को पूरा करना है।
जानकारी के अनुसार देहरा कॉलेज प्रशासन ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय द्वारा एफसीए क्लीयरेंस मिलने के बाद कैंपा फंड जमा कराने के लिए जरूरी फाइल सरकार को भेज दी है। प्रदेश सरकार द्वारा केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय को कैंपा फंड जमा कराने के बाद ही चिह्नित वन भूमि शिक्षा विभाग के नाम हो सकेगी। प्रदेश सरकार को कैंपा फंड के तौर पर करीब 80 लाख रुपये जमा करवाने होंगे।
देहरा कॉलेज के लिए चिन्हित भूमि पर कुल 232 पेड़ हैं। इसमें से 60 पेड़ों को काटा जाना है। इसकी एवज में सरकार को कैंपा फंड जमा करवाना होगा। भूमि पर स्थिति 172 पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रदेश सरकार द्वारा कैंपा फंड जमा कराने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय द्वारा मंजूरी के बाद कॉलेज भवन निर्माण के लिए रास्ता साफ हो गया है। देहरा में राष्ट्रीय राजमार्ग 503 के किनारे स्थित 2.7013 हेक्टेयर चिन्हित वन भूमि के लिए एफसीए की मंजूरी मिल चुकी है।
पहले चिह्नित जमीन की एफसीए क्लीयरेंस के लिए करीब 23 बिंदुओं पर आपत्तियां लगाई गई थीं। देहरा के काॅलेज के प्राचार्य सतीश सोनी और प्रो. कर्ण पठानिया ने इन आपत्तियों को दूर करने में अहम भूमि निभाई थी और जरूरी कागजात जुटाए थे। अब प्रदेश सरकार को संबंधित मंत्रालय को कैंपा फंड जमा करना होगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साल 2017 में देहरा में कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। उस समय से अभी तक इस कॉलेज को सरकारी स्कूल देहरा में चार कमरों में चलाया जा रहा है।
प्रदेश सरकार द्वारा कैंपा फंड जमा कराने के बाद देहरा कॉलेज के भवन निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। करीब 80 लाख रुपये कैंपा फंड के जमा कराए जाने हैं। - सतीश सोनी, प्राचार्य, देहरा कॉलेज