धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा का नवनिर्मित मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) गर्भवती महिलाओं को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं देने के उद्देश्य से बनाया गया था। फिलहाल यहां केवल बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) ही संचालित हो रहा है। अल्ट्रासाउंड, रक्त जांच और अन्य परीक्षणों के लिए महिलाओं को पुराने अस्पताल परिसर तक जाना पड़ रहा है जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने पहले अप्रैल के अंत तक सभी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा था लेकिन जुलाई समाप्त होने के करीब पहुंचने के बावजूद अस्पताल पूरी तरह संचालित नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं अभी तक स्थानांतरित नहीं हो पाई हैं। कई जरूरतमंद महिलाओं को मजबूरी में निजी केंद्रों में महंगे परीक्षण करवाने पड़ रहे हैं जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार मातृ-शिशु अस्पताल में रैंप का निर्माण पूरा हो चुका है। अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) भी मिल गया है। परिसर को अधिग्रहित करने के लिए समिति का गठन कर दिया गया है। अब केवल सभी चिकित्सा सुविधाओं को नए भवन में स्थानांतरित किया जाना शेष है।
अस्पताल में सभी कार्य पूरे हो चुके हैं। फायर एनओसी भी मिल गई है। अब केवल परिसर की सफाई कर सभी सुविधाओं को यहां स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद महिलाओं को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, टांडा मेडिकल कॉलेज