केलांग (लाहौल-स्पीति)। एक हजार साल पुराना स्पीति घाटी स्थित विश्व प्रसिद्ध ताबो मठ को बदलते मौसम के कारण हो रही बारिश से नुकसान हो रहा है। मंगलवार को इसको लेकर एक बैठक हुई। मिट्टी से निर्मित यह प्राचीन मठ हर वर्ष बारिश व बर्फबारी और तापमान में तेज उतार-चढ़ाव के कारण प्रभावित हो रहा है।
इसके चलते मठ की बाहरी संरचना के साथ-साथ भीतर की दीवारों पर बनी बहुमूल्य भित्ति चित्रकला भी खतरे में पड़ गई है। इसी गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए ताबो पंचायत के तीनों गांवों के नंबरदार टाशी छेरिंग, कुंसल बौद्ध और सोनम येशे, मुख्य लामा ताबो गोंपा व प्रतिनिधि राजेंद्र बौद्ध, यश बौद्ध, राज कुमार और सोनम लूंडुप ने दिल्ली और शिमला से आई टीम के साथ विस्तृत चर्चा की।
बैठक में मठ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संरचनात्मक मरम्मत तथा आधुनिक संरक्षण तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। स्थानीय प्रतिनिधियों ने बदलते जलवायु प्रभावों को देखते हुए शीघ्र, प्रभावी और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतिनिधियों का कहना है कि यह पहल क्षेत्र की इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।