धर्मशाला। धर्मशाला में आयोजित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हिमाचल में व्यवस्था परिवर्तन के अपने एजेंडे को देशभर तक पहुंचाने की कोशिश कर गए।
सम्मेलन को मुख्यमंत्री ने केवल डिजिटल शासन और प्रशासनिक सुधारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके बहाने प्रदेश सरकार के साढ़े तीन साल के कामकाज, नीतिगत बदलावों और भविष्य के विकास का व्यापक खाका भी सामने रखा।
शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रयासों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि हिमाचल में विकास का मॉडल पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता और व्यवस्था परिवर्तन पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री ने तीन साल 10 महीने के कार्यकाल के दौरान हुए बदलावों को रेखांकित करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया।
उनके संदेश का प्रमुख आधार यह रहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तैयार करने होंगे। उन्होंने हिमाचल के विकास के दृष्टिकोण को देशभर के नीति-निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री के विजन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को विशेष महत्व दिया गया। स्वास्थ्य और पर्यटन को एक साथ जोड़कर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लिए नई संभावनाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
2032 तक सबसे अमीर राज्य बनाने का संकल्प दोहराया
मुख्यमंत्री ने हिमाचल को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर और वर्ष 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का संपल्प फिर दोहराया। सम्मेलन ने मुख्यमंत्री को प्रदेश की नीतियों और विकास संबंधी सोच को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया। सम्मेलन का मूल विषय ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधार रहा लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन को व्यापक आर्थिक और सामाजिक बदलावों से जोड़ते हुए सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
धर्मशाला में नेशनल ई गर्वनेंस कॉफ्रेंस में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू को सम्मानित करते हुए ।