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Kangra News: टांडा मेडिकल कॉलेज में कंधे की जन्मजात विकृति की सफल सर्जरी

Sun, 16 Nov 2025 05:41 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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दुर्लभ विकृति स्प्रेंगेल डिफॉरमिटी से पीड़ित बच्चा। -स्रोत : संस्थान
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कांगड़ा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा (टीएमसी) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। टीएमसी में पहली बार नौ वर्षीय बच्चे के कंधे की जन्मजात विकृति का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया है। यह हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह का पहला सफल ऑपरेशन बताया जा रहा है।
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हाल ही में अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में पदभार संभालने वाले सुपर स्पेशलिस्ट डॉ. आयुष शर्मा और उनकी समर्पित टीम ने यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने बताया कि ऊना जिला के अंब अंदौरा का नौ वर्षीय बच्चा जन्म से ही कंधे की एक अत्यंत दुर्लभ विकृति स्प्रेंगेल डिफॉरमिटी से पीड़ित था। यह समस्या हजारों बच्चों में से किसी एक में पाई जाती है।
उन्होंने कहा कि बीमारी का पता चलने पर बच्चे के माता-पिता इलाज के लिए शिमला और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में भी गए, लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिल पाया। मगर टीएमसी में डॉ. आयुष शर्मा ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन लगभग 3 घंटे तक चला और पूरी तरह सफल रहा। ऑप्रेशन के बाद अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे किसी प्रकार का दर्द भी नहीं है।
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इस जटिल ऑप्रेशन को सफल बनाने में एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. शैली और डॉ. भानु ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. आयुष शर्मा ने हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विपिन शर्मा के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. आयुष शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।

दुर्लभ जन्मजात विकृति है स्प्रेंगेल डिफॉरमिटी
स्प्रेंगेल डिफॉरमिटी एक दुर्लभ जन्मजात विकृति है। यानी यह समस्या बच्चे में जन्म से ही मौजूद होती है। यह मुख्य रूप से कंधे की हड्डी (स्कैपुला या अंसफलक) से जुड़ी होती है। इस स्थिति में आमतौर पर शरीर के एक तरफ की कंधे की हड्डी (स्कैपुला) सामान्य से अधिक ऊंची और गलत स्थिति में होती है। इससे स्पष्ट रूप से एक कंधा दूसरे की तुलना में ऊंचा और छोटा दिखता है। प्रभावित कंधे की गतिशीलता सीमित हो जाती है, खासकर हाथ को कंधे के स्तर से ऊपर उठाने में बच्चे को कठिनाई होती है। इसके लिए अकसर बचपन में ही सही उपचार की आवश्यकता होती है।

दुर्लभ विकृति स्प्रेंगेल डिफॉरमिटी से पीड़ित बच्चा। -स्रोत : संस्थान

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