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Kangra News: खरपतवार से बचाने के लिए गेहूं में छिड़कें दवाई

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पालमपुर (कांगड़ा)। इसी माह के दूसरे फखवाड़े में होने वाले कृषि कार्यों को लेकर वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह जारी की है। कृषि विवि पालमपुर के विशेषज्ञों की ओर से जारी सलाह में कहा गया है कि गेहूं में जहां खरपतवारों में 2-3 पत्तियां आ गई हों, तो उनके नियंत्रण के लिए वेस्टा नामक रसायन को घोलकर प्रति कनाल की दर से छिड़काव करें।
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जहां घास कुल के खरपतवारों के साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों की समस्या भी हो तो वहां क्लोडिनापफॅाप की 24 ग्राम (10 डब्ल्यू पी) या 16 ग्राम (15 डब्ल्यूपी) प्रति कनाल व उसके पश्चात 2-4-डी (80 डब्ल्यूपी) की 50 ग्राम प्रति कनाल 30 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 2-4-डी का छिड़काव क्लोडिनापफॅाप के छिड़काव के 2-3 दिन के बाद करें। छिड़काव के बाद अगर आवश्यक हो तो हल्की सिंचाई करें अन्यथा खरपतवारनाशी का प्रभाव कम हो जाएगा। निचले और मध्यवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में सूरजमुखी की ईस-68415 किस्म की बिजाई करें। कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच 25-30 सेंटीमीटर का फासला अवश्य रखें।
कृषि विवि पालमपुर के प्रसार निदेशक डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के निचले पर्वतीय क्षेत्रों में भिंडी की उन्नत किस्म पालम कोमल, परभनी क्रांति, पी-8, अर्का अनामिका, वर्षा उपहार, यूएस-7109 (संकर), पांचाली (संकर) आदि की बिजाई करने का यह उचित समय है। वहीं, मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन सब्जी टमाटर, बैंगन, हरी मिर्च और शिमला मिर्च पनीरी उगाने का भी उचित समय चल रहा है। इसके साथ ही फसल संरक्षण में भूरी सरसों और राया की फसल में इन दिनों तेले का प्रकोप होता है। तेला या एफीड की रोकथाम के लिए फसल पर मिथाईल डेमिटान 25 ईसी या डाईमिथोएट 30 ईसी एक मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
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