जसूर(कांगड़ा)। फंगल संक्रमण एक आम समस्या है जो अकसर गर्मी और मानसून के मौसम में बढ़ जाती है। सुलियाली आयुर्वेदिक अस्पताल में रोजाना के 5 से 10 रोगी इस रोग से संबंधित अस्पताल में जांच के लिए आ रहे हैं। यह न केवल त्वचा को प्रभावित करता है, बल्कि शारीरिक संघटन को भी प्रभावित कर सकता है। इसके इलाज के लिए उपयोग में आने वाली दवाएं लंबे समय तक खानी पड़ सकती हैं, जिससे परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए, इस अप्रैल, हमें फंगल संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि हम आने वाले मौसम में इस रोग से बच सकें।
फंगल इन्फेक्शन क्या होता है?
यह एक सूक्ष्म जीव है जो पर्यावरण में विद्यमान होता है और त्वचा पर बिना हमें नुकसान पहुंचाए रहता है। गर्मियों और बरसात के मौसम में नमी, गीलापन, और डंपनेस फंगस की विकास के लिए फेवरेबल माहौल होता है, जिससे ये फंगस बढ़ने लगते हैं और बीमारी का कारण बनते हैं, जिसे हम फंगल इन्फेक्शन के रूप में जानते हैं।
लक्षण -फंगल संक्रमण के प्रतीत होने पर, त्वचा पर गोल रिंग के आकार के निशान होते हैं, जो खुजली का कारण बनते हैं। ये निशान आमतौर पर त्वचा में दिखाई देते हैं, और इसका प्रसार शरीर के अन्य क्षेत्रों में भी हो सकता है
बार बार होने के कारण-
-डॉक्टर की सलाह के बिना स्वयं फंगल संक्रमण की दवाई का सेवन करना
-शरीर की सही सफाई न करना
-इम्यून सिस्टम कमजोर होना
-लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना
-टाइट कपड़े पहनना
बचाव के उपाय-
-दिन में कम से कम एक बार नहाना अवश्य करें
-अपने नाखूनों को छोटा रखें और साफ रखें
-बारिश में भीगने के बाद तुरंत गीले कपड़े या जूते बदलें।
-वस्त्रों और अन्य वस्तुओं को दूसरों के साथ साझा न करें।
सुलियाली आयुर्वैदिक अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सन्नी जरयाल ने बताया कि गर्मियों की शुरुआत में ही अस्पताल में इसके रोगी बढ़ने लगे हैं। दिन के 5 से 10 रोगी इस रोग से संबंधित अस्पताल आ रहे हैं, और कुछ लोग सालों से इस समस्या से परेशान हैं। डॉ. सन्नी ने मरीजों को फंगल संक्रमण से बचाव के लिए संक्रमण का पता लगते ही तुरंत डाॅक्टर के पास जांच करवाने की सलाह दी है।