धर्मशाला। प्रदेश में लंबे समय से बारिश न होने के कारण फसलों के साथ-साथ फलों पर भी विपरीत असर पड़ा है। जिला कांगड़ा में तीन महीने से बारिश नहीं हुई है। सूखे जैसे हालात से इस बार नींबू प्रजाति के फलों का आकार नहीं बढ़ पाया है। गलगल, नींबू, संतरा और मौसमी जैसे फलों का आकार सामान्य से भी काफी छोटा रह गया है।
किसानों का कहना है कि गलगल, नींबू, संतरा और मौसमी के पेड़ों पर फूलों के आने के समय बारिश की आवश्यकता थी। मगर मौसम की बेरुखी ने अच्छी आय की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सूखे के कारण फलों का आकार के विकास में बाधा आई, जिससे बाजार में सही दाम मिलने की संभावना भी घट गई है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार गलगल और अन्य फलों का आकार आधा रह गया है। इससे पहले लीची और आम की फसल भी बिना बारिश प्रभावित हुई थी। बारिश न होने के कारण लीची और आम का आकार भी घट गया था, जिससे किसानों को फलों के उचित दाम नहीं मिल सके।
फलों की खरीद के लिए बनाए 21 केंद्र
उद्यान विभाग ने कांगड़ा जिले में किन्नू, माल्टा और संतरा को 12 रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि गलगल को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदना शुरू कर दिया है। इसके लिए जिलेभर में 21 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं।
फलदार पौधों की बिक्री भी हुई प्रभावित
प्रदेश में 15 दिसंबर से सर्दियों में लगने वाले फलदार पौधों की बिक्री शुरू हो गई है। मगर सूखे जैसे हालात के कारण किसानों का पौधे खरीदने और रोपने में रुझान कम हो गया है। जमीन में नमी न होने के कारण नए पौधों के सूखने की आशंका अधिक रहती है। इस कारण किसान पौधरोपण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
उद्यान विभाग जिला कांगड़ा के उपनिदेशक डॉ. कमल शील नेगी ने कहा कि बारिश की कमी से नींबू प्रजाति के फलों का आकार प्रभावित हुआ है। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया है कि फलों की बेहतर देखभाल और बचाव के उपाय अपनाएं। उन्होंने कहा कि कोहरे से छोटे पौधों के बचाने के लिए खेतों की सिंचाई करें। जिन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा नहीं है, वहां किसान पौधों को सूखी घास से ढक दें और एक तरफ से पौधे को खुला छोड़ दें, ताकि उसे पर्याप्त धूप मिल सके।