धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (आरपीजीएमसी) एवं अस्पताल टांडा में संचालित कैंटीन, दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े किरायेदारों पर लाखों रुपये का किराया फंसा हुआ है। ऑडिट जांच की टेस्ट चेकिंग में सामने आया है कि विभिन्न किरायेदारों से कुल 27 लाख चार हजार 326 रुपये की बकाया राशि लंबे समय से वसूल नहीं हो पाई है। वर्षों से किराया जमा न होने के कारण रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के राजस्व को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।
इन चार प्रमुख किरायेदारों पर फंसा है बकाया
एम/एस श्याम सुंदर कैंटीन: नवंबर 2011 से दिसंबर 2025 तक (लगभग 14 साल) का सर्वाधिक 16,82,601 किराया लंबित है।
क्षेत्रीय प्रबंधक, एचपीएमसी: दिसंबर 2025 तक कुल 4,71,040 की राशि बकाया है।
एम/एस दिनेश एसटीडी एवं फोटोस्टेट: अक्तूबर 2019 से दिसंबर 2025 तक 3,93,745 का भुगतान नहीं हुआ है।
एम/एस वीरेंद्र सिंह टक शॉप: जून 2025 से दिसंबर 2025 तक 1,56,940 का किराया शेष है।
आरकेएस के फंड पर असर
परिसर में दुकानों व कैंटीन के किराये से होने वाली आमदनी का उपयोग अस्पताल के रखरखाव, मरीज सुविधाओं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में किया जाता है। वसूली में हुई भारी ढिलाई के कारण समिति की आय सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। अब अस्पताल प्रशासन के समक्ष न केवल इस भारी-भरकम राशि की वसूली की चुनौती है, बल्कि भविष्य के लिए भी सख्त नियम तय करने की जरूरत है।
टांडा में दुकानों का किराया लंबे समय से लंबित है। इनमें से एक दुकानदार ने बकाया राशि की अदायगी शुरू कर दी है। तीन अन्य मामले अदालत में विचाराधीन हैं। न्यायालय के फैसले के बाद ही आगामी वसूली प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल