धर्मशाला। ई-नीलामी में संपत्ति खरीदने वाली महिला से 1.01 करोड़ रुपये लेने के बावजूद भौतिक कब्जा न सौंपने वाले बैंक को करारा झटका लगा है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश धर्मशाला डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने बैंक की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र न होने का हवाला देकर वादपत्र रद्द करने की मांग की गई थी। अब इस मामले में बैंक पर दीवानी मुकदमा चलेगा।
शिकायतकर्ता ने सरफेसी अधिनियम के तहत ई-नीलामी में सबसे बड़ी बोली लगाकर संपत्ति खरीदी थी। बैंक को 1.01 करोड़ रुपये चुकाने के बाद भी वास्तविक कब्जा नहीं सौंपा गया। आरोप है कि ई-नीलामी के समय बैंक ने यह अहम जानकारी छिपाई कि इस संपत्ति को लेकर कर्जदार और बैंक के बीच ऋण वसूली अधिकरण-1 चंडीगढ़ में मामला पहले से लंबित है।
बचाव में बैंक ने आदेश सात नियम 11(डी) और सरफेसी अधिनियम की धारा 34 का हवाला देकर दावा किया था कि दीवानी अदालत को इसकी सुनवाई का अधिकार नहीं है। बैंक ने यह भी बताया था कि शिकायतकर्ता 18 नवंबर 2023 के आदेश के खिलाफ ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण दिल्ली में अपील कर चुकी हैं।
अदालत ने बैंक की इन दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि नीलामी खरीदार का ब्याज और हर्जाने का दावा स्वतंत्र प्रकृति का है। सरफेसी अधिनियम में खरीदार को इस तरह के दावे के लिए कोई वैकल्पिक उपाय नहीं दिया गया है। इसलिए दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र बाधित नहीं होता। अदालत ने बैंक की अर्जी खारिज करते हुए लिखित बयान दाखिल करने के लिए 15 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है।