पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की मधुमक्खियां और परागण पर वार्षिक समूह की तीन दिवसीय बैठक का शुभारंभ कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने किया। इस दौरान कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय उन किसानों की मदद करेगा, जो उनके साथ जुड़कर वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खियों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने विशेषज्ञों को निर्देश दिए कि वे क्षेत्र विशेष के आधार पर मधुमक्खी पालकों से संपर्क कर उनके शहद की गुणवत्ता को देखें ताकि उसका भौगोलिक सूचकांक (जीआई) के आधार पर निर्धारण किया जा सकें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के (फसल विज्ञान) उप महानिदेशक डाॅ. टीआर शर्मा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विश्व में भारत शहद का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और निर्यात में चौथे स्थान पर है।
आईसीएआर की (पौध संरक्षण एवं जैव सुरक्षा) सहायक महानिदेशक डाॅ. पूनम जसरोटिया ने बतौर विशिष्ट अतिथि ने कृषि में मधुमक्खियों के योगदान पर चर्चा करते हुए उनका मानव जीवन के लिए विभिन्न उपयोग को विस्तार से बताया। परियोजना समन्वयक डाॅ. सचिन सुरोशे ने देश के 25 केंद्रों में मधुमक्खियों पर चलाई जा रहीं परियोजना को लेकर विस्तार से जानकारी प्रदान की। डाॅ. संजय कुमार ने बताया कि बैठक में देश के 25 केंद्रों से करीबन 35 वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों , प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों और शोधार्थियों समेत 100 प्रतिभागियों भाग ले रहे हैं। इस दौरान प्रदेश के प्रगतिशील मधुपालकों लाल चंद, निजय कुमार, दौलत राम और सतीश कुमार को सम्मानित किया गया। आयोजन सचिव डाॅ. सुरेंद्र शर्मा ने कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। इस मौके पर प्रसार शिक्षा निदेशक डाॅ. विनोद शर्मा, डाॅ. आरसी मिश्रा, डाॅ. अताउर रहमान, डाॅ. प्रदीप कुमार छुनेजा, संविधिक अधिकारी, विभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।