बरियाल (कांगड़ा)। विकास खंड नगरोटा सूरियां को जवाली शिफ्ट करने की अधिसूचना के विरोध में प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर याचिका सोमवार को खारिज होने से क्षेत्र में मायूसी छा गई है। अब विकास खंड बचाओ संघर्ष समिति सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में जुट गई है।
10 जून 2025 को पंचायत पुनर्सीमांकन की आड़ में विकास खंड नगरोटा सूरियां को जवाली शिफ्ट करने की सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। इसकी भनक लगते ही नगरोटा सूरियां क्षेत्र की जनता ने विरोध किया और 12 जून को पूर्व प्रधान संजय महाजन के नेतृत्व में विकास खंड बचाओ संघर्ष समिति का गठन कर विकास खंड मुख्यालय में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। इसी दौरान सात जुलाई को विकास खंड बचाओ संघर्ष समिति ने विरोध में प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी और याचिका को मंजूर कर आठ जुलाई को उच्च न्यायालय ने विकास खंड मुख्यालय को शिफ्ट करने पर रोक लगा दी। संघर्ष समिति के सदस्य 27वें दिन यानी आठ जून को विकासखंड मुख्यालय में धरने पर बैठे रहे और उनकी मौजूदगी में ही प्रशासन ने पुलिस बल के सुरक्षा घेरे में विकासखंड नगरोटा सूरियां का सामान निकाल कर ट्रक में भर जवाली शिफ्ट कर दिया। संघर्ष समिति ने उच्च न्यायालय की अवहेलना की याचिका दायर कर दी और उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के बाद विकास खंड मुख्यालय को जवाली से फिर नगरोटा सूरियां लाना पड़ा। याचिका पर अंतिम सुनवाई के बाद 22 दिसंबर यानी सोमवार को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने विकासखंड मुख्यालय को जवाली शिफ्ट करने की सरकार की अधिसूचना को वैध करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
अब विकास खंड बचाओ संघर्ष समिति विकास खंड को शिफ्ट होने से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार कर रही है। विकास खंड अधिकारी मनोज शर्मा ने कहा कि उन्हें अभी पंचायतीराज मंत्रालय से कोई निर्देश नहीं आया है। निर्देश मिलते ही खंड मुख्यालय को जवाली शिफ्ट कर दिया जाएगा।