धर्मशाला। बचपन में रसोई के भीतर मां का गूंथा हुआ आटा लेकर खिलौने बनाने के शौक ने दिल्ली की रूपाली को आज सफल कलाकार बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर धर्मशाला स्थित कांगड़ा कला संग्रहालय में लगी तीन दिवसीय प्रदर्शनी में भाग लेने आईं रूपाली आज कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जन्मी रूपाली ने गणित विषय में एमएससी और बीएड करने के बाद साल 2017 तक दिल्ली में पीजीटी गणित शिक्षिका के रूप में नौकरी की। हालांकि नौकरी से मन भरने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह से कला के क्षेत्र में उतर गईं। उन्होंने पारंपरिक लिप्पन कला, थ्रीडी क्ले कला, टेक्सचर पेंटिंग और मंडला आर्ट में ऐसी महारत हासिल की कि वे अब तक देश के विभिन्न राज्यों में करीब 40 सफल प्रदर्शनियां लगा चुकी हैं।
अपनी इस कला को व्यावसायिक रूप देने के लिए उन्होंने मां के सम्मान में ‘ममाज बलेसिंग’ नाम से एक वेबसाइट शुरू की है। आज वह सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल एप्स के जरिए अपनी पेंटिंग्स बेचकर हर महीने 30 से 50 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। वर्तमान में उनके साथ चार लोगों की टीम भी काम कर रही है। धर्मशाला आने से पहले वे शिमला, दिल्ली, ग्वालियर, जयपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में प्रदर्शनियां लगा चुकी हैं।
रूपाली अपनी सफलता का श्रेय अपने मायके के साथ-साथ अपने ससुराल पक्ष को देती हैं। कहती हैं, अक्सर माना जाता है कि शादी और गृहस्थी के बाद महिलाओं के सपने पीछे छूट जाते हैं, लेकिन मेरे मामले में ऐसा नहीं हुआ। साल 2009 में दिल्ली के शैलेंद्र शर्मा से शादी के बाद मुझे परिवार का पूरा साथ मिला। जब साल 2017 में मैंने एक अच्छी-भली पीजीटी शिक्षक की नौकरी छोड़ने का फैसला किया तो पति और सास ने मेरा पूरा हौसला बढ़ाया। वर्तमान में मेरे परिवार में मेरी सास, पति और एक बेटी हैं, जो हर मोड़ पर मेरे साथ खड़े रहते हैं। परिवार के इसी मजबूत सपोर्ट और ढाल के कारण ही मैं आज बिना किसी चिंता के देशभर के विभिन्न राज्यों में 40 के करीब प्रदर्शनियां लगा सकी हूं।
दिल्ली की रुपाली की और से बनाई गई कलाकृति। - संवाद
दिल्ली की रुपाली की और से बनाई गई कलाकृति। - संवाद