कुलदेश धीमान की ओर बनाए गए बैग। स्वयं
धर्मशाला। धर्मशाला के तंगरोटी की कुलदेश धीमान ने 55 वर्ष की उम्र में दोबारा जूट के बैग बनाने का काम शुरू कर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी है।
कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन में उनका कारोबार बंद हो गया था, जिसके बाद उन्हें खेतीबाड़ी की ओर लौटना पड़ा। फरवरी 2026 में उन्होंने श्वेता चौधरी, अंजना धीमान और रेनू के साथ मिलकर काम फिर शुरू किया।
कुलदेश वर्ष 2006 से जागोरी संस्था से जुड़ी हैं। संस्था से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से उन्होंने जूट के बैग बनाने के हुनर को स्वरोजगार में बदला। फिलहाल इस काम से उन्हें दो से तीन हजार रुपये तक की आय हो रही है। उनका लक्ष्य कारोबार बढ़ाने के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ना है।
उनका मानना है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं।
कुलदेश धीमान की ओर बनाए गए बैग। स्वयं