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Kangra News: शोध कार्यों को मिले अलग बजट, अध्यापकों की कार्य कुशलता बढ़ाने का भी रहे ख्याल

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धर्मशाला। जिला कांगड़ा के शिक्षाविदों और अभिभावकों को भी सुक्खू सरकार के आने वाले बजट से काफी उम्मीदें हैं। इस दौरान कोई शोध कार्यों के लिए विशेष बजट का प्रावधान होने की उम्मीद लगाए बैठा है तो कोई अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए विशेष बजट के प्रावधान की। वहीं ऐसे भी शिक्षाविद हैं, जिन्हें सुक्खू सरकार के आने वाले बजट से स्कूलों के ढांचे और उनमें सुविधाओं को उपलब्ध करवाने बारे बजट जारी होने की उम्मीदें हैं। सीयू के धर्मशाला कैंपस के लिए प्रदेश सरकार से जल्द 30 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग लोगों ने उठाई है।
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क्या कहते हैं शिक्षाविद्-
राज्य के आगामी बजट में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को ज्यादा पैसा दिया जाना चाहिए, क्योंकि शिक्षा का मसला हर व्यक्ति से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए भी ज्यादा बजट की दरकार है। इसके अलावा शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार को अलग से बजट की व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि छात्र बेहतर से रिसर्च कर सकें। इसके साथ ही टीचर की कार्य कुशलता को बढ़ाने के लिए सरकार को एक विशेष बजट का प्रावधान करना चाहिए। अध्यापकों को बेहतर प्रशिक्षण देकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है, इसकी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए दूरदराज के स्कूलों को ज्यादा धनराशि मुहैया करवाई जानी चाहिए।
- ज्ञान भट्ट, प्रवक्ता (इतिहास)


हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा पर बहुत सारा पैसा खर्च कर रही है। इसलिए सरकार को उचित बुनियादी ढांचे, फर्नीचर की उपलब्धता और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि शिक्षण और सीखने के परिणाम नई शिक्षा नीति के मानदंडों को पूरा करते हैं, स्कूलों में उचित प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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- अरविंद डोगरा, शिक्षाविद


- सरकार को अपने बजट में चाहिए कि वह निजी स्कूलों में फीस का एक पैमाना रखें, ताकि गरीब बच्चों को भी निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए कोई दिक्कत न आए। निजी स्कूलों में फीस समेत अन्य चीजों पर अधिक पैसे लगने पर आम आदमी के बच्चे इन स्कूलों का रुख नहीं कर पाते है। हालांकि सरकारी स्कूलों में भी अच्छी पढ़ाई होती है।
- संजय राठौर, शिक्षााविद


प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर एक स्कूल होना चाहिए और उसमें प्रतियोगिता के आधार पर संबंधित उपमंडल के बच्चों को प्रवेश मिलना चाहिए। सरकार को बजट में ऐसा प्रावधान करना चाहिए।
- संजीव सूद, प्रवक्ता


- शिक्षा के स्तर को नई दिशा देने की अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए अध्यापक को शिक्षा के अतिरिक्त अन्य कोई कार्य नहीं सौंपा जाना चाहिए। स्कूल में 15 दिन की पढ़ाई के बाद कक्षा में बच्चों के बीच स्पर्धा होनी चाहिए। इससे बच्चों का फीड बैक मिलेगा, जबकि स्पर्धा को लेकर बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ेगा। एक ही अध्यापक लंबे समय तक स्कूल में नहीं रखा जाना चाहिए।
- राजेश चौधरी, अभिभावक


जगह-जगह स्कूल खोलने की बजाय आधुनिक समय में स्कूल में बुनियादी सुविधाओं को लेकर ध्यान देने की नितांत आवश्यकता है। हर स्कूल में विशेषज्ञ अध्यापक रखे जाने चाहिए। अध्यापक का तबादला स्कूल सेशन शुरू होने से पहले होना चाहिए। इससे बच्चों की पढ़ाई में किसी प्रकार की बढ़ा नहीं आएगी।
- नरेश कुमार, प्रवक्ता


नकल पर अंकुश लगना चाहिए। प्राइवेट स्कूल में परीक्षा केंद्र नहीं होने चाहिए, जबकि परीक्षाएं भी अपने स्कूल की बजाय अन्य स्कूल में करवाईं जानी चाहिए। नकल की वजह से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है।
राजीव चंबियाल, प्रवक्ता

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में अध्यापकों के रिक्त पद बड़ी संख्या में हैं और सरकार को बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन्हें जल्द भरना चाहिए।
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विनोद जसवाल, प्रवक्ता भौतिक विज्ञान

12जेएनडी33: लोगों की समस्याओं को सुनते हुए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला। संवाद

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