नरसिंह मंदिर, रक्कड़ में चल रही कथा में उपस्थित संगत। स्रोत: आयोजक
रक्कड़ (कांगड़ा)। जैसे मथानी के बिना मक्खन नहीं निकलता, वैसे ही सत्संग और हरिकथा के बिना मनुष्य के जीवन में विवेक प्रकट नहीं होता। यह विचार स्वामी अतुल कृष्ण महाराज ने शुक्रवार को भगवान नरसिंह मंदिर रक्कड़ में चल रही श्रीनरसिंह पुराण कथा के छठे दिन व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि चौरासी लाख योनियों में श्रेष्ठ मनुष्य जीवन को ईश्वर ने बुद्धि दी है, पर उसकी सार्थकता तभी है जब इसका उपयोग परमार्थ में किया जाए। अगर इंसान भी पशु-पक्षियों की भांति जीवन बिता दे, तो यह विशेष कृपा व्यर्थ हो जाती है।
स्वामी अतुल ने कहा कि जब तक जीव ईश्वर की ओर नहीं मुड़ता, तब तक उसके जीवन में न तो कुशलता आती है और न ही शांति। प्रभु के नाम में इतनी शक्ति है कि वह सभी पापों को मिटा सकता है। यदि मन पापमय हो तो सैकड़ों हत्याओं से भी मन नहीं कांपता, लेकिन अगर धर्म समाया हो तो एक चींटी की भी मृत्यु से मन विचलित हो उठता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्त प्रह्लाद की भक्ति, भगवान नरसिंह के अवतार और मत्स्य अवतार की पावन कथा को बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ सुना।