कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कृषि मंत्री चंद्र कुमार। स
पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने कहा कि वेटरनरी फार्मासिस्टों को रिफ्रेश कोर्स करवाए जाएंगे, ताकि पशुपालकों को और बेहतर सुविधा उपलब्ध करवा सके। वेटरनरी फार्मासिस्ट सीधे तौर पर किसानों से जुड़े हुए होते हैं, जिनको वर्तमान परिदृश्य के अनुसार अपने कौशल को और बेहतर करने की जरूरत है।
चंद्र कुमार बुधवार को चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के सभागार में प्रदेश सह-पशु चिकित्सीय परिषद की संगोष्ठी के शुभारंभ पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पशुपालकों की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए पशुपालन विभाग की अहम भूमिका है। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पशुपालन सेवाओं को बेहतर बनाकर पशुपालकों की आजीविका में सुधार करना है। पशुपालन विभाग को और बेहतर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशु जनगणना का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। इससे प्रदेश में लावारिस पशुओं की संख्या का भी पता लग सकेगा। वेटरनरी फार्मासिस्टों द्वारा रखी गई मांगो पर विचार-विमर्श किया जाएगा। संगोष्ठी में कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर और ऊना जिला से करीब 300 वेटरनरी फार्मासिस्टों ने भाग लिया। सेमिनार में डॉ. आशीष शर्मा ने पैरावेट काउंसिल एक्ट 2010 और नियम 2011 के बारे में विस्तार से चर्चा की। डॉ. शमा खान ने हाउ टू मेक आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन इफेक्टिव रिजल्ट ओरिएंटेड ऑन कैल्फ बॉर्न बेसिस विषय पर अपने विचार रखे।
डॉ. विनोद शर्मा ने एनिमल मैनेजमेंट एंड न्यूट्रिशन फ्रॉम न्यू बॉर्न कैल्फ टू प्रेग्नेंट, लेक्टेटिंग काऊ पर चर्चा की। इस मौके पर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ अजय कुमार, डॉ. रजनीश भरोल, उपनिदेशक डॉ. मोहिंद्र शामा, सीमा गुलेरिया, रजिस्ट्रार कृषि विश्वविद्यालय डॉ. मधु चौधरी और अन्य मौजूद रहे।