धर्मशाला। विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्ति में शोध कार्य, अकादमिक रिकॉर्ड और अध्यापन अनुभव को दरकिनार कर केवल लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती करना पूरी तरह गलत है। हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने यह कड़ा ऐतराज जताया है।
एबीवीपी की प्रदेश मंत्री नैंसी अटल ने कहा कि शिक्षक की वास्तविक योग्यता का सही आकलन महज एक लिखित परीक्षा से नहीं हो सकता।शैक्षणिक रिकॉर्ड, शोध पत्र, प्रकाशन, विषयगत विशेषज्ञता और अध्यापन अनुभव प्राध्यापक चयन के अनिवार्य आधार होते हैं। यूजीसी की व्यवस्था में विषय विशेषज्ञों से युक्त चयन समितियों की भूमिका स्पष्ट रूप से तय है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में सामान्य भर्ती परीक्षा को विश्वविद्यालयों की अकादमिक चयन प्रक्रिया पर लागू करना यूजीसी नियमों के विपरीत है और पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए 80 प्रतिशत अंक अकादमिक योग्यता और 20 प्रतिशत साक्षात्कार के लिए निर्धारित हैं। आवेदन ऑनलाइन लिए जाते हैं और अंक प्रक्रिया भी पारदर्शी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पारदर्शी व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो इसे बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने सरकार के सलाहकारों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या विधेयक लाने से पहले यूजीसी नियमों और मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन किया गया था। उन्होंने पंजाब और ओडिशा के अनुभवों से सीख लेने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता से खिलवाड़ किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा और सरकार को शिक्षकों व विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए।