धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के पश्चिमी जोन (कांगड़ा) में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और दुग्ध उत्पादन को संगठित करने की दिशा में सहकारिता विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग ने इस जोन में एक साल में रिकॉर्ड 275 नई मिल्क सोसायटियों का पंजीकरण किया है। पूर्व में पंजीकृत 13 सोसायटियों को मिलाकर अब कुल संख्या 288 पहुंच गई है।
विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पंजीकरण की इस प्रक्रिया को निरंतर जारी रखा जाए, ताकि हर पात्र पशुपालक को इस अभियान से जोड़ा जा सके। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि हजारों पशुपालकों को अब अपने दूध की बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। मिल्क सोसायटियों के माध्यम से दूध की खरीद सीधे पशुपालक के घर-द्वार पर सुनिश्चित की जाएगी।
इससे न केवल परिवहन पर होने वाला खर्च बचेगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। विशेषज्ञों के अनुसार संगठित ढांचे से जुड़ने के कारण दूध की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होगी और पशुपालकों को उचित मूल्य मिलेगा। नियमित भुगतान की व्यवस्था से बिचौलियों का हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
कहां-कितनी सोसायटियां हुईं पंजीकृत
पालमपुर-69
धर्मशाला-61
हमीरपुर-60
देहरा-41
ऊना-21
नूरपुर-19
चंबा-04
विभागीय नियमों के अनुसार एक नई सोसायटी के गठन के लिए न्यूनतम 11 सदस्यों का होना अनिवार्य है। इससे अधिक सदस्य अपनी स्वेच्छा से जुड़ सकते हैं। जो पशुपालक अभी तक किसी समूह का हिस्सा नहीं बने हैं वे 2027 तक अपने क्षेत्रीय दुग्ध सहकारी समिति या विभागीय कार्यालय में पंजीकरण करवा सकते हैं।
कोट्स
पश्चिमी जोन में मिल्क सोसायटियों को पंजीकृत करने का कार्य जोरों पर चल रहा है। अब तक 275 नई सोसायटियां बनाई जा चुकी हैं। हमारा उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और पशुपालकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। -राकेश कुमार, डिप्टी रजिस्ट्रार, पश्चिमी जोन धर्मशाला