शाहपुर के चमड़ेरा गांव में बहू रंजना का कन्यादान करतीं सास विमला देवी। -स्रोत : जागरुक पाठक
शाहपुर (कांगड़ा)। उपमंडल शाहपुर के चंमडेरा गांव में एक ससुर और सास ने परंपराओं की बेड़ियों को तोड़ते हुए अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा दिया और खुद मंडप में बैठकर उसका कन्यादान कर नए जीवन की राह दिखाई। ससुर ईश्वर दास और सास विमला देवी ने बेटे की मौत के बाद बहू को बेटी की तरह रखा और करीब डेढ़ साल बाद उसका पुनर्विवाह करवाया।
चंमडेरा गांव के ईश्वर दास और विमला देवी ने समाज के सामने संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक अनूठी मिसाल पेश की है। बदलते दौर में इस परिवार ने साबित कर दिया कि रिश्ते केवल खून के नहीं, बल्कि अपनत्व, सम्मान और आपसी विश्वास से निभाए जाते हैं। चंमडेरा गांव की 29 वर्षीय रंजना कुमारी के पति राजिंद्र कुमार की करीब डेढ़ साल पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी।
इस दुखद हादसे और कठिन समय के बीच ससुर ईश्वर दास और सास विमला देवी ने घुटने टेकने के बजाय बहू के भविष्य को सुरक्षित और खुशहाल संवारने का बड़ा संकल्प लिया। उन्होंने समाज की पुरानी परंपरागत सोच से ऊपर उठते हुए रंजना का पुनर्विवाह तय किया और माता-पिता का फर्ज निभाते हुए स्वयं उसका कन्यादान भी किया।
इस पुनीत कार्य में परिवार के अन्य सदस्यों ने भी रिश्तों की नई परिभाषा लिखते हुए पूरी भागीदारी निभाई। रंजना के देवर इंद्र कुमार और सुरेंद्र पाल ने अपना दायित्व निभाते हुए विवाह की सभी व्यवस्थाओं की कमान संभाली। उन्होंने अपनी भाभी को नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक घरेलू सामान भेंट कर पूरे आदर-सम्मान के साथ डोली में बिठाया। इस भावुक पल को देखकर हर आंख नम हो गई और लोग इस परिवार के हौसले की सराहना कर रहे हैं।