प्रवीण प्रकाश कुमार
धर्मशाला। जिला मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत सोकणी दा कोट में प्रस्तावित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्लांट को लेकर जलशक्ति विभाग और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि आमने-सामने आ गए हैं।
एक ओर जल शक्ति विभाग का कहना है कि जमीन विभाग के नाम ट्रांसफर हो चुकी है, पंचायत से एनओसी मिल चुकी है और टेंडर भी अवार्ड कर दिया गया है, इसलिए कार्य रुकना तर्कसंगत नहीं है। दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण हैं, जो चयनित स्थान को अनुपयुक्त बताते हुए विरोध में खड़े हैं।
स्थिति उस समय टकरावपूर्ण हो गई, जब ठेकेदार मशीनरी लेकर मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों ने काम शुरू नहीं होने दिया। फिलहाल विभाग और पंचायत के बीच यह मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया है।
2.65 करोड़ की लागत, रोजाना 10 लाख लीटर पानी शुद्ध होगाचकवन वार्ड नंबर-5 में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट की लागत 2.65 करोड़ रुपये है और यह रोजाना 10 लाख लीटर पानी शुद्ध करने की क्षमता रखता है।
योजना से बरसात में नलों से आने वाले मटमैले व दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान होना था। विभाग का कहना है कि नई साइट की तलाश और दोबारा टेंडरिंग से न केवल लागत बढ़ेगी बल्कि हजारों लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने में भी देरी होगी।