धर्मशाला। वीबी जीरामजी के अंतर्गत मजदूरों के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) जी का जंजाल बन गया है। सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप में आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते कार्यस्थलों पर मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पा रही है। एप में चेहरा स्कैन न होने के कारण सुबह निर्धारित समय पर पहुंचने के बावजूद कई मजदूरों को काम शुरू किए बिना ही मायूस होकर घरों को लौटना पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार, मनरेगा कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति एनएमएमएस एप के जरिए ही दर्ज करना अनिवार्य है। इसके तहत कार्यस्थल पर मस्टररोल के आधार पर प्रत्येक मजदूर का चेहरा स्कैन कर डिजिटल हाजिरी लगाई जाती है। तकनीकी खामियों और सर्वर संबंधी अड़चनों के कारण स्कैनिंग की यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही जिससे मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरी न मिलने के डर से लौट रहे मजदूर
मजदूरों का कहना है कि वे समय पर कार्यस्थल पहुंचते हैं लेकिन एप के काम न करने के कारण हाजिरी नहीं लग पाती। यदि डिजिटल उपस्थिति दर्ज न हो, तो दिनभर पसीना बहाने के बाद भी मजदूरी मिलने की कोई गारंटी नहीं रहती। इसी संशय के चलते वे बिना काम किए लौटने को मजबूर हैं। मजदूरों ने ग्रामीण विकास विभाग और प्रशासन से मांग की है कि सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए या नेटवर्क व तकनीकी बाधा की स्थिति में उपस्थिति दर्ज करने के लिए ऑफलाइन या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि किसी की दिहाड़ी न छूटे।
-
सॉफ्टवेयर में कोई व्यापक खराबी नहीं है। केवल उन्हीं दूरदराज और दुर्गम पंचायतों में ऐसी समस्या सामने आती है जहां मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहद कमजोर या बाधित रहती है। अन्य सभी क्षेत्रों में एनएमएमएस प्रणाली के जरिए हाजिरी सुचारु रूप से दर्ज की जा रही है। -अभिनीत कात्यायन, जिला परियोजना अधिकारी, कांगड़ा