टांडा (कांगड़ा)। उच्च रक्तचाप को अक्सर उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारी रोजमर्रा की आदतें ही इस साइलेंट किलर की असली वजह बन रही हैं। जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनावपूर्ण जीवनशैली और मोबाइल में घंटों बिताना... ये सब आज के युवाओं और बच्चों को भी हाई ब्लड प्रेशर का शिकार बना रहे हैं।
टांडा मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुल भटनागर कहते हैं कि आधुनिक जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता के चलते उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। चिंताजनक बात यह है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों की दर करीब ढाई गुना अधिक है। जंक फूड, व्यायाम न करना, अत्यधिक नमक का सेवन, मोबाइल पर अधिक समय बिताना और आरामदायक जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि हृदयाघात (हार्ट अटैक) के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से 12 लोग हृदयाघात के पहुंचते हैं, इनमें अधिकांश मामलों में उच्च रक्तचाप ही इसकी वजह बनता है।
उच्च रक्तचाप से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
डॉ. मुकुल भटनागर ने कहा कि उच्च रक्तचाप अब बच्चों में भी देखा जा रहा है, जो पहले दुर्लभ माना जाता था। यह चिंताजनक हैं। इससे बचने के लिए अपनी जीवनशैली को बदलें और स्वस्थ आहार के साथ व्यायाम जरूर करें। उच्च रक्तचाप एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त का दबाव धमनियों की दीवारों पर सामान्य से अधिक होता है। प्राथमिक उच्च रक्तचाप का कोई स्पष्ट कारण नहीं होता, जबकि द्वितीयक उच्च रक्तचाप किसी अन्य बीमारी जैसे कि किडनी या थायरायड विकार से जुड़ा होता है। यदि समय रहते इसका इलाज न हो तो यह दिल का दौरा, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
बिना लक्षण साइलेंट किलर के उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप के लक्षण सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, चेहरे का तमतमाना, नाक से खून आना आदि हैं। हालांकि डॉ. मुकुल भटनागर कहते हैं कि उच्च रक्तचाप वाले कुछ लोगों को लक्षण भी महसूस नहीं हो सकते हैं। यह बिना लक्षण के भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। ऐसे में सावधान रहना जरूरी है।
कैसे करें उच्च रक्तचाप से बचाव?
नियमित रूप से बीपी की जांच करें
संतुलित और कम नमक वाला आहार लें
प्रतिदिन 30 मिनट व्यायाम करें
तंबाकू और शराब से दूरी बनाएं
तनाव को कम करें और पर्याप्त नींद लें