डरोह (कांगड़ा)। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते हर कोई चाह रहा है कि वह स्वस्थ रहे और इस बीमारी की चपेट में न आए। स्वास्थ्य विभाग भी जरा सी खांसी, बुखार, गले में दर्द होने पर कोरोना टेस्ट की सलाह दे रहा है, लेकिन भवारना अस्पताल में टेस्टिंग रिपोर्ट आने के बाद बरती जा रही कथित लापरवाही की वजह से लोग अब अस्पतालों में हो रहे कोविड टेस्ट प्रक्रिया और इनकी रिपोर्ट पर सवाल उठाने लग पड़े हैं।
स्वास्थ्य महकमे के ही कुछेक कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से लोग असमंजस में हैं कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव है या निगेटिव। मामला पंचायत सलोह के एक परिवार का है, जहां कुछ दिन पहले ही एक बुजुर्ग महिला कोरोना से संक्रमित थी।
जब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई तो पंचायत प्रतिनिधियों ने बुजुर्ग महिला के परिवार के बाकी सदस्यों को भी अपना टेस्ट करवाने को कहा। सोमवार को परिवार के चार सदस्यों ने भवारना के सिविल अस्पताल में आकर अपना आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया। बुधवार को उन चार सदस्यों में से एक महिला सदस्य को भवारना अस्पताल से करीब सवा ग्यारह बजे फोन आया कि वह कोरोना संक्रमित हो गई हैं और वे खुद को होम आइसोलेट कर लें और अपनी आशा कार्यकर्ता से इस संदर्भ में एक मेडिकल किट ले लें। सारा परिवार इस रिपोर्ट से हताश और दुखी था।
उस महिला को परिवार ने हिम्मत बंधाई और उसे अलग आइसोलेट करने की तैयारी पूरी कर ली थी कि शाम को साढ़े तीन बजे मैसेज आया कि वह निगेटिव हैं। जब परिवार के सदस्यों ने जिस नंबर से सुबह फोन आया था पर बात की तो पहले तो उसने यह कह कर पल्लू झाड़ लिया कि वह एक बार दोबारा चेक करके बताएंगे और फिर कहा कि वे सीएसआईआर की लैब में पता कर लें कि रिपोर्ट क्या है। पूरा दिन परिवार और महिला इसी उधेड़ बुन में लगा रहा कि वे क्या करें। मैसेज को सच मानें या सुबह आई उस फोन कॉल को। इस संदर्भ में जब खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीएस दियोल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जो जिला से रिपोर्ट शेयर होती है उस रिपोर्ट को ओर एसएमएस वाली रिपोर्ट को काउंटर चेक करना पड़ेगा कि जब हमारे पास उस महिला की रिपोर्ट आई तो उक्त महिला पॉजिटिव थी या नहीं।