धर्मशाला। जिले में वर्तमान में शून्य से पांच साल तक के एक तिहाई से अधिक बच्चे बौनेपन और दुबलेपन का शिकार हो रहे हैं।
जिले में 29 फीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार हैं जबकि 12 फीसदी बच्चे वजन से कम, तीन फीसदी वजन से ज्यादा और दो फीसदी दुबलेपन के शिकार हैं। विभाग की ओर से इस विषय पर सर्वे किया गया है। बच्चों के इस आंकड़े की रिपोर्ट महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी की गई है।
कांगड़ा में कुल 80 हजार बच्चे शून्य से पांच वर्ष की आयु तक के हैं। इनमें से 8038 बच्चे नाटेपन, 14,521 बच्चे मध्य वर्ग से हैं। विभाग का कहना है कि वर्तमान में बच्चे शारीरिक, मानसिक व सामाजिक तौर पर अस्वस्थ हैं। विभाग की ओर से पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से बच्चों के पोषण, विकास सहित वृद्धि को मापा जा रहा है।
यह कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से किया जा रहा है। विभाग की ओर से सितंबर तक यह आंकड़ा एकत्रित किया गया है। बच्चों के कुपोषण के शिकार होने के कई कारण बताए गए हैं। सबसे बड़ा कारण हमारा खानपान का बदलता वातावरण और मोबाइल की लत है।
आज की नई पीढ़ी समय पर खाना न खाना, लंबे समय से पैक खाना, अधिकतर समय बाहर का खाना व खाना खाने के एक घंटे के अंदर चाय पीना, चीनी-नमक का कम उपयोग सहित अन्य कई कारण शामिल हैं। जिला कांगड़ा में लोगों को जागरूक करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कई अभियानों व कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
विभाग की ओर से मिशन शक्ति और मिशन तृप्ति को भी शामिल किया गया है। मिशन शक्ति में लोगों को खान पान और मिशन तृप्ति में गर्भवती महिलाओं को खाने पीने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।