जसूर (कांगड़ा)। हिमाचल और पंजाब के बीच स्थित चक्की खड्ड की सीमाओं की पहचान के लिए सीमांकन कार्य न होने से खनन माफिया बेलगाम है। चक्की खड्ड को नूरपुर और पठानकोट जिलों में सक्रिय खनन माफियाओं के लिए एक सोने की खान माना जाता है। यहां खड्ड की सीमाओं की पहचान न होने के कारण खनिजों का अवैध खनन रोका नहीं जा सका है। खनन विभाग और पुलिस भी इस कारण बेेबस नजर आ रही है। हालांकि पंजाब राज्य में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध है, लेकिन पठानकोट जिले में स्थापित स्टोन क्रशर इकाइयां अभी भी चालू हैं। कच्चा माल कथित तौर पर हिमाचल प्रदेश के अधिकार क्षेत्र वाली चक्की खड्ड से निकाला जा रहा है।
उच्च स्तरीय जांच जरूरी : एमआर शर्मा
क्षेत्र के प्रमुख पर्यावरणविद एमआर शर्मा ने कहा कि चक्की की सीमाओं के सीमांकन की आवश्यकता है। स्टोन क्रशर इकाइयों के कथित नकली चालानों के तहत खनिजों के अवैध निष्कर्षण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यह भी जांच की जानी चाहिए कि क्या चालान एम-फॉर्म के साथ जारी किए गए थे, जो स्टोन क्रशर इकाइयों के तैयार उत्पादों को बेचने के लिए अनिवार्य है। अवैज्ञानिक और अवैध खनन पर्यावरण, कृषि भूमि और निचले कांगड़ा क्षेत्र में भूजल स्रोतों को भी समाप्त कर रहा है।
चक्की खड्ड की सीमाओं के निर्धारण से नूरपुर और पठानकोट जिलों के पुलिस प्रशासन को आसानी होगी। सीमांकन का काम दोनों जिलों की पुलिस को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध खनन के माध्यम से हो रहे अपराध को रोकने और कानून व्यवस्था को सदृढ़ करने में मदद करेगा।
अशोक रतन, एसपी नूरपुर