धर्मशाला। ग्राहक को गलत क्रेडिट कार्ड जारी करने पर एसबीआई क्रेडिट कार्ड प्रबंधन को इसे जारी करने से लेकर बंद होने तक 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 72 हजार रुपये देने होंगे। उपभोक्ता आयोग की आदेश प्रति प्राप्त होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर दंडात्मक हर्जाने के रूप में ग्राहक को एकमुश्त 75 हजार रुपये अदा करने होंगे। ऐसा न करने पर यह राशि को 9 फीसदी ब्याज के साथ अदा करनी होगी।
मुकद्दमा फीस 15 हजार रुपये भी एसबीआई कार्ड प्रबंधन को चुकानी होगी। साथ ही ग्राहक की सिविल रिपोर्ट में विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्देश दिया है। इस संपूर्ण प्रक्रिया को 60 दिनों के भीतर पूरा नहीं किया तो 25 हजार रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी देना होगा। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
आयोग ने पियूष निवासी कोतवाली बाजार धर्मशाला की शिकायत पर यह फैसला सुनाया है।
शिकायतकर्ता ने कहा था कि जनवरी 2024 में उन्होंने एसबीआई कार्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया था। एसबीआई आईआरसीटीसी कार्ड की पेशकश की गई थी। हालांकि, कोई भी केवाईसी दस्तावेज अथवा लिखित सहमति जमा करने से पहले उन्होंने इसकी विशेषताओं और लाभों के कारण एसबीआई प्राइम विस्तारा कार्ड चुनने का निर्णय लिया।
उन्होंने क्रेडिट कार्ड प्रबंधन की सत्यापन कॉल के दौरान भी एसबीआई आईआरसीटीसी कार्ड से एसबीआई प्राइम विस्तारा कार्ड में बदलने के बारे कहा था। प्रबंधन की ओर से उनके आग्रह के बाद भी एसबीआई आईआरसीटीसी कार्ड को जारी कर दिया, जिसके बारे ग्राहक ने ई-मेल के माध्यम से क्रेडिड कॉर्ड प्रबंधन को संदेश भी भेजा और एसबीआई प्राइम विस्तारा कार्ड जारी करने का अनुरोध किया लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
वहीं, एसबीआई आईआरसीटीसी कार्ड पर ब्याज और देर से भुगतान पर जुर्माना लगाना जारी रखा।
इसने ग्राहक के सिबिल स्कोर पर प्रतिकूल प्रभाव डाला और काफी वित्तीय तनाव और मानसिक पीड़ा का कारण बना। कार्ड 8 अगस्त 2024 को बंद कर दिया गया लेकिन 11 अगस्त 2024 को उन्हें संदेश मिला जिसमें 3,068 रुपये का भुगतान करने की मांग की गई थी। इस पर ग्राहक ने सेवाओं में कमी के चलते आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई और सभी तथ्यों को जांचने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।