परागपुर (कांगड़ा)। श्री नीलकंठ महादेव मंदिर हार में कथा के दूसरे दिवस पर परागपुर के पंडित सुमित शास्त्री ने वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव ही ऐसे देवता जो अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं। भगवान विष्णु को आभूषणों द्वारा भगवती को स्तुतियों से जबकि प्रभु शिव जल के एक लोटे से प्रसन्न हो जाते हैं। शीघ्र प्रसन्न होने के कारण भगवान शिव का नाम आशुतोष पड़ा।
इसके बाद शास्त्री ने वर्णन करते हुए कहा कि भगवान नारायण के इष्ट शिव हैं, जबकि भगवान शिव के इष्ट नारायण हैं, इनमें किसी प्रकार का कोई अंतर नहीं है और जो इनमें अंतर करता है वो अपनी आत्मा-परमात्मा के ज्ञान से सदा के लिए दूर हो जाते हैं। कथा में सुंदर भजनों जैसे तेनु कीथे मैं बिठावां शेरावालिये और जन्म तेरा अनमोल रे ने आए हुए भक्तों को झूमा दिया। कथा में अश्वनी कुमार, अमित, राकेश कुमार, तिलकराज, अल्का, डिंपल, रजनी और नीलम ने भाग लिया।