टांडा (कांगड़ा)। विश्व निद्रा दिवस पर हुए लोकल सर्वे में सामने आया है कि 59 फीसदी भारतीय जरूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए घातक है।
सर्वे में खुलासा हुआ है कि सोने से पहले पानी पीने, मोबाइल या टीवी देखते रहने और ध्वनि प्रदूषण, मच्छर, कमरे में अंधेरा न होना भी नींद न आने का कारण है। रात के समय चाय, काफी, सॉफ्ट ड्रिंक, धूम्रपान, शराब का सेवन भी नींद न आने के मुख्य कारणों में से एक है।
टांडा मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक विभाग के डॉ. मेजर सुखजीत सिंह ने कहा कि कम नींद के चलते थकान और डार्क सर्कल्स ही नहीं, बल्कि इसके दीर्घकालिक असर हो सकते हैं। लंबे समय तक नींद की कमी के चलते दिल की बीमारी, मोटापा, टाइप-2 शूगर जैसी मेटाबोलिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इसके कारण लोगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिसके चलते गलतियां होने की संभावना बढ़ जाती है और एकाग्रता की कमी के चलते समस्याओं का निदान करने की क्षमता कम हो जाती है। डॉ. सुखजीत ने बताया कि नींद कम आने के चलते लोग दवाइयों का सहारा लेते हैं, जो नींद के लिए आसान समाधान लगती हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका सेवन गंभीर जोखिमों की ओर अग्रसर करता है।
बिना डॉक्टरी सलाह नींद की गोली शुरू में अपना प्रभाव नहीं दिखाती, लेकिन लंबे समय तक इनका सेवन करने से इसका असर नहीं होता। व्यक्ति अधिक खुराक लेना शुरू कर देता है, जिसके अधिक दुष्प्रभाव होते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर नींद के लिए कैफीन का सेवन कम करें। सोने का निश्चित समय तय करें और उसका पालन करें। शयन कक्ष से मोबाइल, टीवी और लैपटॉप दूर रखें। कमरे में अंधेरा होने से शरीर में मेलाटोनिन का रिसाव होता है, जो बेहतर नींद के लिए सहायक होता है।
इसके अलावा परिवार के साथ बैठना, चर्चा करना अच्छी नींद के लिए बेहतर है। सोने से 4 घंटे पहले भोजन करना और पानी कम पीना अच्छी नींद ला सकते हैं। सूर्यास्त से पहले भोजन करने का नियम अनिद्रा को दूर करता है।